Monday, September 27, 2021
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‘विभाजन के बाद दिल्ली में हुए सबसे भयावह दंगे, राष्ट्र की अंतरात्मा पर घाव जैसा’ – दिल्ली दंगों पर कोर्ट ने कहा

“भारत प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा रखता है। ऐसे राष्ट्र के लिए 2020 के दिल्ली दंगे राष्ट्र की अंतरात्मा पर घाव जैसे हैं, इन दंगों को विभाजन के बाद का सबसे भयावह दंगा कहना गलत नहीं होगा।"

दिल्ली की एक अदालत ने गुरूवार (22 अक्टूबर 2020) को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों पर टिप्पणी की। अदालत ने इन दंगों को विभाजन के बाद राजधानी में हुए सबसे भीषण और भयावह दंगे बताया। साथ ही यह भी कहा कि पूरा घटनाक्रम विश्व शांति के लिए आदर्श बनने की आकांक्षा रखने वाले देश की अंतरात्मा के लिए घाव जैसा था।

आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की कुल 3 मामलों में जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। इसके अलावा अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में इस साल हुए दंगों के अन्य पहलुओं पर भी टिप्पणी की। 

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इस साल की शुरुआत में 24 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई क्षेत्र दंगों की चपेट में आ गए थे। दंगे इतने भयानक थे कि इन्होंने विभाजन के बाद हुए नरसंहार की याद दिला दी। बेहद सीमित समय में दंगे पूरी राजधानी में फ़ैल गए और नतीजा यह निकला कि कई निर्दोष लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।”

अतिरिक्त सत्र के न्यायाधीश विनोद यादव ने टिप्पणी करते हुए कहा, “भारत प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा रखता है। ऐसे राष्ट्र के लिए 2020 के दिल्ली दंगे राष्ट्र की अंतरात्मा पर घाव जैसे हैं, इन दंगों को विभाजन के बाद का सबसे भयावह दंगा कहना गलत नहीं होगा।” अदालत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इतने बड़े पैमाने पर हुए भीषण दंगे पूर्व नियोजित षड्यंत्र के बिना सम्भव नहीं हैं। 

इसके बाद न्यायाधीश ने कहा कि यह बात स्वीकार करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं कि ताहिर हुसैन अपराध के स्थान पर मौजूद थे और अपने समुदाय के दंगाइयों को भड़काने में अहम भूमिका निभा रहे थे। इतना ही नहीं यह सभी आरोप गंभीर प्रवृत्ति के हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।

अदालत के अनुसार जिन तीन मामलों में ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज की गई है, इन मामलों के सरकारी गवाह उस क्षेत्र के ही निवासी हैं। ऐसे में ताहिर हुसैन द्वारा डराए या धमकाए जाने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है। 

जिन 3 मामलों में ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज की गई, वो हैं: 

  1. पहला दयालपुर क्षेत्र में हो रहे दंगों के दौरान ताहिर हुसैन के आवास की छत पर पेट्रोल बम की बरामदगी और सैकड़ों लोगों की कथित तौर पर मौजूदगी। इसके अलावा अन्य समुदाय के लोगों पर पेट्रोल बम और पत्थर फेंकना।
  2. दूसरा मामला एक दुकान में आगजनी और लूटपाट, जिसमें दुकान के मालिक को लगभग 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
  3. तीसरा मामला, एक दुकान में लूटपाट और आग लगाने संबंधित और इस मामले में दुकान मालिक को 17 से 18 लाख रुपए का नुकसान हुआ। 

आम आदमी पार्टी का पूर्व पार्षद दिल्ली दंगों के मामले में मुख्य षड्यंत्रकर्ता है। दंगों की साजिश ने बारे में भी उसने कई हैरान करने वाली बातें कही थीं। उसने पूछताछ के दौरान कहा:

“मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि पहले ही जमा कर लिए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।” 

दिल्ली की एक अदालत ने 21 अगस्त, 2020 को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा था कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर संप्रदाय विशेष के लोग हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। 

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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