भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार (1 फरवरी 2026) को संसद में संघीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। यह उनका लगातार नौवाँ बजट होगा, जो एक रिकॉर्ड है। पहली बार बजट रविवार को पेश हो रहा है, जो ऐतिहासिक है।
इस बजट पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, खासकर मध्य वर्ग की, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। मध्य वर्ग महँगाई, टैक्स बोझ और जीवन यापन की बढ़ती लागत से जूझ रहा है। इस लेख में हम बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया, मध्य वर्ग की प्रमुख चुनौतियों और इस बजट से उनकी उम्मीदों पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं।
बजट बनाने की प्रक्रिया को समझें
भारत में संघीय बजट बनाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत होती है। यह छह महीने पहले शुरू हो जाती है और अत्यंत गोपनीय रहती है, जिसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं-
बजट सर्कुलर जारी करना: वित्त मंत्रालय का आर्थिक मामलों का विभाग सितंबर-अक्टूबर में सभी मंत्रालयों और विभागों को बजट सर्कुलर जारी करता है। इसमें अगले वित्त वर्ष के लिए राजस्व और व्यय के अनुमान माँगे जाते हैं।
प्री-बजट मीटिंग्स: नवंबर-दिसंबर में वित्त मंत्री स्टेकहोल्डर्स जिसमें उद्योग जगत, किसान संगठन, अर्थशास्त्री, राज्य सरकारें आदि होने हैं, उनके साथ बैठके करते हैं। ये मीटिंग्स नीतिगत सुझाव देने में मदद करती हैं।
अनुमान तैयार करना: सभी मंत्रालय अपने व्यय और राजस्व के अनुमान भेजते हैं। वित्त मंत्रालय इनका मिलान करता है, घाटे का आकलन करता है और राजकोषीय नीति निर्धारित करता है।
हलवा सेरेमनी और लॉक-इन: बजट प्रिंटिंग की अंतिम कड़ी में पारंपरिक ‘हलवा सेरेमनी’ होती है। इस बार यह 27 जनवरी 2026 को हुई। इसमें वित्त मंत्री हलवा बनाती और बाँटती हैं, जो बजट टीम के लिए शुभ मानी जाती है।
इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ‘लॉक-इन’ हो जाते हैं। वो बाहरी दुनिया से संपर्क काटकर बजट दस्तावेज तैयार करते हैं। यह गोपनीयता सुनिश्चित करता है
अंतिम स्वीकृति और पेशकश: कैबिनेट की मंजूरी के बाद बजट लोकसभा में पेश होता है। इसके बाद चर्चा, मांगें अनुदान और वित्त विधेयक पारित होते हैं। यह प्रक्रिया न केवल आर्थिक योजना है, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। 2026 बजट में ग्लोबल चुनौतियाँ जैसे अमेरिकी टैरिफ्स का भी असर दिख सकता है।
बजट 2026 से मध्य वर्ग की उम्मीदें
1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से मध्य वर्ग को बड़ी राहत की उम्मीद है। प्रमुख अपेक्षाएँ:
हाउसिंग और शिक्षा-स्वास्थ्य: होम लोन ब्याज पर छूट बढ़ाना, मेडिकल खर्च पर डिडक्शन।
महंगाई नियंत्रण और रोजगार: GST में सुधार, आवश्यक वस्तुएँ सस्ती करना। स्किल डेवलपमेंट और जॉब क्रिएशन पर फोकस।
अन्य: कैपिटल गेंस टैक्स सरलीकरण, पेंशन और सेविंग स्कीम में राहत। विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्य वर्ग को राहत से खपत बढ़ेगी, जो अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगी।
उम्मीद और वास्तविकता का संतुलन
बजट 2026 विकसित भारत-2047 के सपने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्य वर्ग की चुनौतियाँ गंभीर हैं, लेकिन अगर सरकार टैक्स राहत और खपत बढ़ाने पर फोकस करती है, तो यह वर्ग फिर मजबूत हो सकता है।
निर्मला सीतारमण का यह नौवाँ बजट न केवल आर्थिक दस्तावेज है, बल्कि करोड़ों मध्य वर्ग परिवारों की उम्मीदों का आईना भी। उम्मीद है कि यह बजट संतुलित और समावेशी होगा, जो सभी वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखेगा।


