Thursday, September 23, 2021
Homeदेश-समाजजम्मू-कश्मीर में बलिदान हुए सुरक्षाबलों के नाम पर होगा सरकारी स्कूलों का नाम, प्रशासन...

जम्मू-कश्मीर में बलिदान हुए सुरक्षाबलों के नाम पर होगा सरकारी स्कूलों का नाम, प्रशासन ने जारी की अधिसूचना

आधिकारिक नोटिस के अनुसार, जिला स्तर पर सूची को अंतिम रूप देने के लिए समिति में एसएसपी, एडीसी, डीपीओ या एसी पंचायत और सेना के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है।

राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार एक के बाद एक कदम उठा रही है। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए केंद्र शासित प्रदेश के स्कूलों का नाम सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के शहीद जवानों के नाम पर रखने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में प्रशासनिक पत्र जारी किया गया है, जिसमें वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के नाम पर रखे जा सकने वाले सरकारी स्कूलों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए जिला स्तर पर एक समिति गठित करने की बात कही गई है।

इसके बाद सत्यापन किया जाएगा और विवरण तैयार किया जाएगा। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, जिला स्तर पर सूची को अंतिम रूप देने के लिए समिति में एसएसपी, एडीसी, डीपीओ या एसी पंचायत और सेना के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा सभी उपायुक्तों को इस सूची को 5 अगस्त 2021 तक जम्मू संभागीय आयुक्त कार्यालय को भेजने के लिए कहा गया था। सूत्रों के अनुसार, कुछ जिलों ने पहले ही उन स्कूलों की सूची जमा कर दिए हैं, जिनका नाम देश की रक्षा में अपने प्राणों को बलि देने वाले बलिदानियों को नाम पर रखे जाने हैं।

साभार: ट्विटर

इस मामले में सरकारी अधिसूचना पिछले सप्ताह जारी की गई थी। इसमें जम्मू, कठुआ, डोडा, पुंछ, रामबन, सांबा, किश्तवाड़, राजौरी, उधमपुर और रियासी के उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों के गाँवों/नगरपालिका वार्डों में सरकारी स्कूलों की पहचान करने का निर्देश दिया गया था। इस साल (2021) के शुरुआत में पंजाब सरकार ने भी 17 सरकारी स्कूलों का नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखा था। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम कविंदर गुप्ता ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है।

राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट कर इस घोषणा के पूर्ण होने की उम्मीद जताई। उन्होंने लिखा कि कुछ साल पहले कश्मीर में सड़कों का नाम शहीदों के नाम पर रखने का एलान हुआ था, लेकिन अभी तक उसका इंतजार किया जा रहा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

गुजरात के दुष्प्रचार में तल्लीन कॉन्ग्रेस क्या केरल पर पूछती है कोई सवाल, क्यों अंग विशेष में छिपा कर आता है सोना?

मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग्स की बरामदगी को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी ने जो दुष्प्रचार किया, वह लगभग ढाई दशक से गुजरात के विरुद्ध चल रहे दुष्प्रचार का सबसे नया संस्करण है।

‘मुंबई डायरीज 26/11’: Amazon Prime पर इस्लामिक आतंकवाद को क्लीन चिट देने, हिन्दुओं को बुरा दिखाने का एक और प्रयास

26/11 हमले को Amazon Prime की वेब सीरीज में मु​सलमानों का महिमामंडन किया गया है। इसमें बताया गया है कि इस्लाम बुरा नहीं है। यह शांति और सहिष्णुता का धर्म है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
123,782FollowersFollow
410,000SubscribersSubscribe