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बांग्लादेश में एक बार फिर ढहा दिया गया हिन्दू मंदिर, बनवाने वाले के परिवार पर हुआ जानलेवा हमला

बांग्लादेश के तंगेल जिले के भात्रा गाँव में बीते शुक्रवार को आठ-नौ लोगों के समूह ने मंदिर में तोड़-फोड़ की और साथ ही मंदिर बनवाने वाले चित्तरंजन के साथ उनके परिवार पर भी हमला किया।

राम मंदिर और बाबरी मस्ज़िद मामला हमारे देश मे इतना बड़ा विवाद है कि जब भी इसपर कोर्ट सुनवाई की तारीख बताता है तो मौजदा कुछ न्यूज़ चैनल अपने आप ही देश मे आपातकाल की घोषणा करने लगते हैं। उन न्यूज़ चैनल को देख रहा दर्शक घर में बैठे हुए, सोते-जागते ख़तरा महसूस करने लगता है। समझना बेहद मुश्किल होता है कि उनको अपने कथित रूप से अल्पसंख्यक होने से डर लगता है या फिर देश में हिंदुओं की संख्या ज़्यादा होने से। हमारे सेक्युलर देश में लोगों के धर्म पर खतरा मंडरा रहा होता है, जबकि धर्म के आधार पर बने देशों में हिंदुओं को और उनके धर्म को सुरक्षित होने का दावा किया जाता है।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार मुस्लिम बहुल देश बांग्लादेश में हिन्दू मंदिर को ढहा देने की घटना सामने आई है। बांग्लादेश के तंगेल ज़िले के भात्रा गाँव में बीते शुक्रवार को आठ-नौ लोगों के समूह ने मंदिर में तोड़-फोड़ की और मंदिर बनवानेवाले चित्तरंजन के साथ उनके परिवार पर भी हमला किया।

ख़बरों की मानें तो ये हमलावर वहाँ के कुछ स्थानीय लोगों की मदद से मंदिर की जगह को हथियाना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी गुंडई दिखाकर मंदिर को तोड़ डाला और परिवार पर भी जानलेवा हमला किया। रंजन ने इस ज़मीन पर करीब बीस साल पहले मंदिर बनवाया था। उनका कहना है कि बहुत पहले से ही कुछ लोगों की नज़र मंदिर पर हमेशा से बनी हुई थी।

बता दें कि बांग्लादेश में समय-समय पर हिंदुओं पर हमला होता आया है। पिछले साल बांग्लादेश के नेत्रकोना जिले के एक मंदिर को नष्ट करने के दौरान मूर्तियों को भी खंडित कर दिया गया था। इसके अलावा 30 दिसंबर को हुए आम चुनावों से पहले यहाँ हिंदुओं के घर भी जला दिए गए थे।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा अगर किसी को लगाना है तो इन घटनाओं के अलावा तस्लीमा नसरीन की किताब ‘लज्जा’ उस हर शख्श को पढ़नी चाहिए जो हर बात पर भारत में रह रहे अल्पसंख्यको पर बेवज़ह खतरा मंडराने की स्थिति पर दुःख जताते हैं। ये किताब बताती है हिंदुओं की बांग्लादेश में उस दयनीय स्थिति को जो सन 1992 के पहले से और आजतक बनी हुई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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