Thursday, June 30, 2022
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कर्नाटक में फिर लौटा हिजाब का जिन्न: मंगलुरु यूनिवर्सिटी में हिजाब पहन आ रही मुस्लिम छात्राएँ, विरोध में ‘भगवा गमछे’ में कॉलेज आने की चेतावनी

आरोप है कि कुछ मुस्लिम छात्रा हिजाब पहनकर क्लास अटैंड भी कर रही हैं। इसके विरोध में हिंदू छात्रों ने भगवा शॉल और भगवा गमछे में कॉलेज आने की चेतावनी दी है।

कर्नाटक (Karnataka) में फिर से हिजाब को लेकर बवाल शुरू हो गया है। पहले यह विवाद उडुपी से शुरू हुआ था। अब मंगलुरु इसका केंद्र है। मंगलुरु यूनिवर्सिटी कॉलेज की मुस्लिम छात्राओं के एक समूह ने हिजाब पहनकर क्लासरूम में आने की इजाजत माँगते हुए मेमोरेंडम दिया है। इन छात्राओं का कहना है कि हजाब यूनिफॉर्म का ही हिस्सा है।

आरोप है कि कुछ मुस्लिम छात्रा हिजाब पहनकर क्लास अटैंड भी कर रही हैं। इसके विरोध में हिंदू छात्रों ने भगवा शॉल और भगवा गमछे में कॉलेज आने की चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि कर्नाटक हाई कोर्ट की रोक के बावजूद मुस्लिम छात्राएँ फैसला मानने को राजी नहीं है। रोक के बाबजूद वे हिजाब में मंगलुरु यूनिवर्सिटी में आ रही हैं। विरोध में गुरुवार (26 मई 2022) को छात्र संगठन ABVP ने यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रदर्शन किया। 

उनके आरोप है कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी मुस्लिम छात्राएँ हिजाब (Hijab Row) पहन कर कॉलेज आ रही हैं और कॉलेज प्रशासन इस पर एतराज नही कर रहा है। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने दावा किया कि 44 छात्राएँ हिजाब पहनकर कॉलेज आती हैं और इनमें से कुछ इसे पहन कक्षाओं में भी शामिल हो रही हैं। प्रदर्शन के दौरान मंगलुरु यूनिवर्सिटी के हिंदू छात्र-छात्राओं ने चेतावनी दी कि अगर कैंपस में कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करवाया गया तो वे भी भगवा साफा पहन कॉलेज आना शुरू करेंगे।

यूनिवर्सिटी ने गुरुवार (26 मई 2022) शाम एक नोटिफिकेशन जारी कर कैंपस में किसी भी धार्मिक लिबास के इस्तेमाल की इजाजत ना होने की बात दोहराई। वहीं मुस्लिम छात्राओं ने माना कि उन्हें कॉलेज प्रशासन की ओर से हिजाब की इजाजत नहीं दी गई थी। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर वाइस चांसलर से लेकर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर तक मुलाकात की थी। 

बता दें कि मंगलुरु यूनिवर्सिटी की मुस्लिम छात्राओं ने डिप्टी कमिश्नर को एक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें छात्राओं ने क्लासरूम में हिजाब पहनने देने की अनुमति माँगी है। एक छात्रा फातिमा ने कहा, “कोर्ट के आदेश के बाद कुछ नहीं हुआ था। हमने शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षाएँ दीं। हमें हाल ही में बिना हिजाब के कक्षाओं में जाने का एक अनौपचारिक नोट मिला है। हम हाई कोर्ट के आदेश के साथ प्रिंसिपल के पास गए और उनसे बात करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकते। वाइस चांसलर ने भी ऐसा ही कहा।”

कुछ मुस्लिम छात्राओं ने दावा किया कि उन्होंने हिजाब नहीं पहना था। उन्होंने अपने सिर को कॉलेज की यूनिफॉर्म के स्कार्फ से ढका था और कहा था कि कॉलेज के प्रॉस्पेक्टस के अनुसार इसकी अनुमति है। उन्होंने कहा कि अब यूनिवर्सिटी सिंडिकेट ने हिजाब के रूप में यूनिफॉर्म के स्कार्फ के इस्तेमाल पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया है।

बता दें कि 16 मई को मैंगलोर विश्वविद्यालय के सिंडिकेट ने छात्रों के लिए एक ड्रेस कोड लागू करने को मँजूरी दी थी। इसमें हिजाब पहनने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

एबीवीपी नेताओं ने कॉलेज प्रबंधन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सभी छात्र सिंडिकेट के आदेश का पालन करें। कॉलेज प्रिंसिपल प्रो. अनसूया राय ने कहा कि सिंडिकेट के हालिया निर्णय के बारे में छात्रों को जागरूक करने के बावजूद कई लोग इसका पालन करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे दावा कर रहे हैं कि निर्णय कानूनी नहीं है। हमने छात्रों को 27 मई से रेस्टिंग रूम में हिजाब हटाने का निर्देश दिया है और इसका उल्लंघन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।” वहीं यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो। पी सुब्रमण्य यदापादिथ्या ने इस मुद्दे पर यूनिवर्सिटी कॉलेज प्रबंधन के साथ शुक्रवार (27 मई 2022) को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है।

क्या है विवाद?

कर्नाटक में हिजाब विवाद की शुरुआत इस साल के जनवरी महीने में उडुपी जिले से हुई थी। यहाँ सरकारी पीयू कॉलेज में 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया था। स्कूल प्रशासन का कहना था कि छात्राएँ पहले हिजाब पहनकर नहीं आती थी, स्कूल में समान ड्रेस के कारण के कारण यह कदम लिया गया था। इसके बाद छात्राओं ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। धीरे-धीरे यह विवाद पूरे राज्य में फैल गया था और इस कारण कई दिनों तक स्कूलों को भी बंद करना पड़ा था। 

हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

हिजाब पहनने को लेकर मामले की सुनवाई एकल पीठ में हुई थी। इसके बाद मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 मार्च को फैसला सुनाते हुए छात्राओं की याचिका को खारिज कर दिया था। छात्राओं की दलील थी कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है। हालाँकि, कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी कि हिजाब पहनना इस्लाम में एक अनिवार्य प्रथा नहीं है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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