कश्मीरी बच्चे की कविता में दिखा हिन्दुस्तान-प्रेम, पाकिस्तान और अलगाववादियों को नहीं भाएँगे ये सुर

हिन्दुस्तान को ऐसे बच्चों पर बड़ा नाज़ है, जिनकी मासूमियत भले ही नफ़रत के साये में पल रही हो, लेकिन उनका दिल सिर्फ़ हिन्दुस्तान के लिए धड़कता है।

कश्मीर के जो हालात हैं उससे पूरी दुनिया वाक़िफ़ है। आए दिन हमलों की गिरफ़्त में रहने वाला कश्मीर कभी पाकिस्तान की छद्म हरक़तों का शिकार होता है, तो कभी अलगाववादी नेताओं की देश-विरोधी विचारधाराओं की भेंट चढ़ता है। इन्हें अक्सर यह कहते पाया गया है कि कश्मीर की जनता भारत के नहीं बल्कि पाकिस्तान के साथ की कामना करती है। पाकिस्तान भी आए दिन ऐसी बयानबाज़ी करता रहता है जिसमें उसकी कुटिल चाल स्पष्ट दिख जाती है। ऐसे माहौल में एक मासूम बच्चे ने अपनी एक कविता के माध्यम से पाकिस्तान और अलगाववादी नेताओं के गाल पर ज़ोरदार तमाचा मारने का काम किया है।

इस कविता में कश्मीरी बच्चे ने ‘भारत देश’ के लिए मानों अपना दिल ही निकालकर सामने रख दिया हो। देशभक्ति की ऐसी अनूठी मिसाल, वो भी इतनी सी उम्र में कम ही देखने को मिलती है। हिन्दूस्तान को ऐसे बच्चों पर बड़ा नाज़ है, जिनकी मासूमियत भले ही नफ़रत के साये में पल रही हो, लेकिन उनका दिल हिन्दुस्तान के लिए धड़कता है।

कश्मीरी बच्चे की यह कविता देश और बाकी दुनिया के लिए संदेश है कि जिस भारत के सीने को पाकिस्तान हमेशा से ही छलनी करता आया है, उसकी असलियत तो बच्चे भी जानते हैं। ये कविता ऐसे ही लोगों के लिए मुँहतोड़ जवाब है जो कहते हें कि कश्मीर की जनता भारत की बजाए पाकिस्तान के साथ रहना चाहती है।

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आइये इस बच्चे की कविता की चंद पंक्तियों पर ग़ौर करते हैं, जिसमें उसने दुनिया को बताना चाहा है कि उसके दिल और दिमाग में केवल भारत ही बसता है…

क्‍या पूछता है मुल्‍क में किसका नज़ारा है
मेरी नज़रों में देखों मुल्‍क का दिलकश नज़ारा है
मेरे हाथों की रेखाओं में नक्‍शे हिंद सारा है
खूं के आख़िरी कतरे ने हिंदुस्‍तान पुकारा है
मेरा दिल है मेरी जां है मेरी आँखों का तारा है
ये हिंदुस्‍तान, ये हिंदुस्‍तान ये हिंदुस्‍तान हमारा है
ये हिंदुस्‍तान, ये हिंदुस्‍तान ये हिंदुस्‍तान हमारा है

भारत, देश के ऐसे बच्चों पर हमेशा गर्व करता है, जिसकी देशभक्ति आसमान छूती है। ऐसे बच्चे एक मिसाल क़ायम करने की दिशा में होते हैं जिनका कोमल मन केवल प्रेम का देना जानते हैं।

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