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‘नकाब के पीछे योगेंद्र यादव’: किसान नेताओं को ‘शूट करने’ आए नकाबपोश की कहानी में लोचा कई

किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच बैठक से पहले रुलदू सिंह मनसा ने दावा किया था कि उनकी गाड़ी के शीशे दिल्ली पुलिस ने तोड़ डाले। इसके बाद एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें वो खुद ये करतूत करते दिख रहे हैं।

गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) से पहले दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में एक के बाद एक नए मोड़ सामने आ रहे हैं। किसान नेताओं ने एक नकाबपोश को मीडिया के सामने पेश किया, जिसने दावा किया कि उसे किसान नेताओं को गोली मारने के लिए रुपए मिले थे। किसान नेताओं को ‘शूट करने आए’ नकाबपोश को पुलिस को सौंप दिया गया है। इससे पहले एक किसान नेता ने खुद अपनी गाड़ी की खिड़कियाँ तोड़ कर दिल्ली पुलिस पर आरोप मढ़ दिए थे।

सिंघु सीमा पर किसान नेताओं द्वारा मीडिया के समक्ष पेश किए गए नकाबपोश ने कहा कि उसे हथियार भी दिए गए हैं और उसकी साजिश थी कि गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर मार्च के दौरान एक व्यक्ति को किसान नेताओं पर बन्दूक चलानी थी और एक को उपद्रव करना था, अगर किसान नहीं रुकते हैं। उसने 10 लोगों की टीम द्वारा गोलीबारी की साजिश की बात करते हुए कहा कि इसका आरोप किसानों पर मढ़ा जाना था।

उसने कहा, “स्टेज पर जो 4 लोग होंगे, उन्हें शूट करने की योजना थी। जिसने ये टास्क हमें दिया है, वो हमसे मिलने आता था तो उसका चेहरा कवर्ड रहता था।” उसन दावा किया कि उसे उन किसान नेताओं की तस्वीरें भी दी गई हैं, जिन्हें शूट किया जाना था। फ़िलहाल नकाबपोश को दिल्ली पुलिस ले गई है। लोगों ने इस खबर पर जम कर प्रतिक्रिया दी है। कइयों को इस नकाबपोश की बातों पर भरोसा नहीं है।

एक व्यक्ति ने इसकी तुलना ‘वेलकम’ फिल्म में गैंगस्टर मजनूँ शेट्टी के एक चमचे से की, जो हर बात में ‘मेरी एक टाँग नकली है..’ वाला डायलॉग बोलता था। एक व्यक्ति ने पूछा कि इस तरह के स्क्रिप्ट्स आखिर लिख कौन रहा है? ‘द स्किन डॉक्टर’ ने इसकी तुलना उन नेताओं से की, जिन्होंने गाँधीजी की प्रतिमा के सामने जाकर घड़ियाली आँसू बहाए थे। ‘कह के पहनो’ ट्विटर पेज ने तो यहाँ तक कह दिया कि मास्क में ये योगेंद्र यादव ही है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस दावे की पुष्टि नहीं करता।

एक व्यक्ति ने ध्यान दिलाया कि उक्त नकाबपोश बीच में ही अपनी लाइनें भूल जाता है, तो एक किसान नेता उसे याद दिला रहा है। दिलीप पंचोली नामक यूजर ने आरोप लगाया कि ये किसान नेता खुद उपद्रव कर के सारे आरोप दिल्ली पुलिस पर मढ़ना चाहते हैं। कुछ यूजर्स ने उससे ओवर एक्टिंग के 50 रुपए काटने की अपील किसान नेताओं से की। लोगों ने इस वीडियो की ‘स्क्रिप्ट और एक्टिंग’ पर सवाल उठाए।

वहीं किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच 11वें राउंड के बैठक से पहले रुलदू सिंह मनसा ने दावा किया था कि उनकी गाड़ी के शीशे दिल्ली पुलिस ने तोड़ डाले हैं। वहीं इसके बाद एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें वो खुद ये करतूत करते दिख रहे हैं। इसमें वो किसान नेताओं के बीच खुद हॉकी स्टिक से अपनी गाड़ी तोड़ रहे हैं और आसपास दिल्ली पुलिस का कोई जवान नहीं दिख रहा। पता चला कि दिल्ली पुलिस के रोकने पर उन्होंने खुद ऐसा किया था।

अपनी ही गाड़ी के शीशे तोड़ते किसान नेता

बताते चलें कि केंद्र सरकार और नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे कथित किसान संगठनों के बीच शुक्रवार (22 जनवरी 2021) को 11वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। संगठनों के अड़ियल रवैए को देखते हुए सरकार ने भी अब बातचीत की अगली तारीख नहीं दी है। अपनी ओर से दिए गए प्रस्तावों पर विचार करने को कहा है। ‘किसान’ नेताओं के अड़ियल रवैए से जनसामान्य का जीवन भी प्रभावित होने लगा है। राकेश टिकैत जैसे नेता हर सुरक्षा मानक को नकारते हुए 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली करने पर अड़े हैं

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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