मोदी कर रहे नेहरू का सबसे बड़ा मलाल मिटाने की कोशिश, विपक्ष लगा रहा अड़ंगा: पूर्व कॉन्ग्रेस नेता

जब नेहरू से पूछा गया कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है तो उन्होंने कहा, “अपनी हिन्दू बहनों को वे अधिकार दिला पाना जो उन्हें सदियों से नहीं मिले।” फिर उनसे उनका सबसे बड़ा मलाल जब पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अपनी मुस्लिम बहनों के लिए यही न कर पाना।”

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता आरिफ मोहम्मद खान ने मोदी के तीन तलाक विरोधी प्रस्तावित कानून की तारीफ करते हुए उसे प्रथम प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता जवाहरलाल नेहरू के अधूरे सपने को पूरा करने वाला बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में इस बिल का विरोध करने वाले राजनीतिक दल ऐसा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रभाव में आकर ऐसा कर रहे हैं।

शाहबानो मामले में दिया था इस्तीफा, मीनाक्षी लेखी ने बिल किया था समर्पित

आरिफ मोहम्मद खान ने कॉन्ग्रेस से तब इस्तीफा दे दिया था जब शाहबानो मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने उच्चतम न्यायालय का फैसला पलटते हुए मुसलमान पतियों को अपनी पत्नी को तलाक के समय गुजारा भत्ता देने से बचाने के लिए कानून लाए थे। उनके इस कदम की न केवल विपक्ष में इज्जत हुई थी बल्कि प्रगतिशील मुसलमानों में कॉन्ग्रेस का चेहरा भी उजागर हुआ था। शायद इसीलिए जब तीन तलाक को आपराधिक कृत्य घोषित करने वाला प्रस्तावित कानून भाजपा ने 2017 में लोकसभा से पारित कराया था तो भाजपा नेत्री मीनाक्षी लेखी ने कानून को विपक्षी दल के नेता रहे आरिफ मोहम्मद खान को समर्पित किया था।

उन्होंने द गार्जियन की पत्रकार ताया ज़िन्किन को 1950 के दशक में दिए गए पंडित नेहरू के साक्षात्कार का जिक्र किया। उस समय जब नेहरू से पूछा गया कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है तो उन्होंने कहा, “अपनी हिन्दू बहनों को वे अधिकार दिला पाना जो उन्हें सदियों से नहीं मिले।” फिर उनसे उनका सबसे बड़ा मलाल जब पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अपनी मुस्लिम बहनों के लिए यही न कर पाना।” आरिफ मोहम्मद खान ने यह विश्वास जताया कि नेहरू आज जहाँ कहीं होंगे, मोदी से अपना यह मलाल मिटाने के लिए बहुत खुश होंगे।

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पोर्टल डेलीओ से बात करते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने हालाँकि भाजपा के विपक्ष पर मुसलमानों के तुष्टीकरण के आरोप पर तो टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, पर उन्होंने इस फैसले की परस्पर तुलना शाहबानो मामले में राजीव गाँधी के उस फैसले से जरूर की जहाँ एक मुसलमान औरत को महज ₹300 से वंचित रखने के लिए संसद ने कानून पलट दिया था।

उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि कैसे तीन तलाक के मसले पर जब केवल उच्चतम न्यायलय का निर्णय आया था तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उसे ख़ारिज कर यह कहा था कि प्रथा बदस्तूर जारी रहेगी। तीन तलाक के मामले लगातार आते भी रहे। लेकिन जब से भाजपा ने कानून बनाकर तीन तलाक देने को आपराधिक कृत्य बनाया है, ऐसे मामले शून्य हो गए हैं।

अच्छे काम के लिए वोट माँगने में  बुराई क्या है?

इसी बातचीत में जब आरिफ मोहम्मद खान से यह पूछा गया कि क्या भाजपा यह सब मुस्लिम महिलाओं के वोटों के ‘लालच’ में कर रही है तो उन्होंने कहा कि सरकारों को बेशक अपने अच्छे और मानवतावादी कार्यों को सामने रखकर वोट माँगने ही चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिम औरतें इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए नरेंद्र मोदी की शुक्रगुज़ार होंगी।

हिंदुस्तान में सेक्युलरिज्म की बात करने वाले पाकिस्तान में उसे कुफ्र बताते हैं  

आरिफ मोहम्मद खान ने भाजपा को ‘सांप्रदायिक’ और ओवैसी या मुस्लिम लीग जैसी पार्टियों को ‘सेक्युलर’ मानने से भी साफ इंकार कर दिया। उन्होंने उदाहरण दिया कि जमात-ए-इस्लामी का संविधान ही कहता है कि वह हिंदुस्तान में इस्लाम पर आधारित सरकार बनाना चाहते हैं। यही नहीं, जमात के लोग पाकिस्तान में सेक्युलरिज्म को कुफ़्र कहकर उसकी निंदा करते हैं और हिंदुस्तान में इसी सेक्युलरिज्म की हिमायत और माँग करते हैं। उन्होंने ऐसे दोहरे चरित्र वाली पार्टियों को चेतावनी देते हुए यह भी जोड़ा कि यह दोहरा चाल-चरित्र इन्टरनेट के दौर में नहीं चलेगा।  

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