Wednesday, July 17, 2024
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‘हम पर थूका, उँगली उठाई’ : नाबालिग का रेप करने वाले फादर लॉरेंस को मिली आजीवन कारावास की सजा, माँ ने बताया चर्च में कैसे हुई बेइज्जती

पीड़ित लड़के की माँ अफसोस जताती हैं कि उनके बेटे का फादर लॉरेंस द्वारा तीन बार शोषण किया गया जिसकी वजह से उनका बेटा 18 साल होने के बाद भी 12 साल का बच्चा ही रह गया है जो डर से घर के बाहर नहीं जाता।

गोवा क्रॉनिकल की एग्जीक्यूटिव एडिटर सोनाक्षी दत्ता को इंटरव्यू देते हुए एक 18 साल के लड़के की माँ ने खुलासा किया है कि कैसे उन्हें अपने बच्चे को न्याय दिलाने के लिए सालों से संघर्ष करना पड़ा जिसका रेप एक चर्च पादरी द्वारा किया गया था। 2015 में फादर लॉरेंस ने 12 साल के लड़के के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाते हुए उसका रेप किया था। ये पादरी मुंबई के दादर के शिवाजी नगर के चर्च में फादर था जिसे इस मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

पीड़ित की माँ ने कहा, “फादर लॉरेंस को अब सजा मिली है लेकिन मुझे पहले ही पता चल गया था कि ये बर्बाद हो जाएगा जब इसने मेरे बेटे के साथ गलत किया था। लॉरेंस ने मेरे और मेरे पति के सामने स्वीकारा था कि उसने हमारे 12 साल के बच्चे के साथ क्या किया। घुटनों पर आकर उसने हमसे माफी माँगी थी कि वो दोबारा ऐसा नहीं करेगा।”

मालूम हो कि 2015 में 12 साल के पीड़त ने पुलिस को बताया था कि वो और उसका भाई चर्च गए थे। प्रार्थना के बाद उसे फादर लॉरेंस ने बुलाया और जब वो अंदर गया तो कमरा बंद कर लिया। उसके बाद उसका यौन शोषण किया। बाद में बच्चे को घायल करके खून से लथपथ छोड़ दिया। बच्चे का कहना था कि ऐसी ही घटना फादर ने उसके साथ कुछ माह पहले भी की थी। बाद में यही सब उसने कोर्ट में बताया था।

बच्चे की माँ के अनुसार, जब उन्होंने फादर के ख़िलाफ़ शिकायत करनी चाही तो लॉरेंस के समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया और इल्जाम लगाया कि पैसों के लिए वो लोग झूठ बोल रहे हैं। इसके बाद जब वो कोर्ट गए तो पादरी के समर्थकों ने उन्हें बेहद अपमानजनक बातें कहीं। पीड़ित लड़के की माँ अफसोस जताती हैं कि उनके बेटे का फादर लॉरेंस द्वारा तीन बार शोषण किया गया जिसकी वजह से उनका बेटा 18 साल होने के बाद भी 12 साल का बच्चा ही रह गया है जो डर से घर के बाहर नहीं जाता और सपोर्ट के लिए उनका हाथ पकड़ता है। इतना ही नहीं माँ ने यह भी बताया कि कैसे उनके बेटे ने इस घटना के बाद दो बार सुसाइड करने की कोशिश की।

वह कहती हैं कि उन्होंने फादर लॉरेंस के बारे में चर्च के वाइस प्रेसिडेंट से शिकायत की थी। इसपर वह बोले ‘जाने दो। कुछ भी हो वो लड़का है।’ इसके बाद वह रोमन कैथॉलिक चर्च के उच्च स्तरीय पादरी पर गईं मगर उन्होंने कहा कि वो रोम जा रहे हैं और आकर समस्या का समाधान करेंगे। हालाँकि जब वह वापस आए तो उन्होंने कभी पीड़ित की ओर ध्यान नहीं दिया बल्कि बाकी लोग पीड़ित परिवार को परेशान करते रहे। उनके परिवार के ख़िलाफ़ चर्च सदस्यों ने मोर्चा खोला और खुली सड़क पर उनके लड़के के साथ हुई घटना के लिए बोलना शुरू किया। चर्च के बड़े पादरी से तो परिवार को आजतक सांत्वना नहीं मिली। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक इंसान उनकी मदद के लिए खड़ा था वो ब्रदर जो सोरोस हैं, वह द सोसायटी ऑफ विंसेट डी पॉल से जुड़े थे और पीड़ित परिवार के साथ हरदम खड़े थे जबकि बड़े पादरी सिर्फ मदद के लिए झूठ बोल रहे थे।

वह बताती हैं कि जब वो और उनके पति चर्च गए थे तो लोगों ने सच में थूक दिया था और उनपर उंगली उठाते हुए ताना दिया था। वह आपबीती बताते हुए कहती हैं कि उनका विश्वास हमेशा से ईश्वर पर था। अब फादर को हुई सजा देख वह कहती हैं कि कुछ भी हो जाए, “हम भयभीत नहीं होंगे और विश्वास है कि बड़े पादरी को भी शीघ्र ही दंडित किया जाएगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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