Wednesday, September 22, 2021
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मुंगेर केस में SP लिपि सिंह सहित 7 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज: आरती के समय भक्तों को बेरहमी से मारने का आरोप

यादव ने शिकायत दायर करते हुए विजयादशमी की रात हुई घटना और मामले की लीपापोती में लगी तत्कालीन एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों की कारगुजारियों का खुलासा किया है। साथ ही एसपी लिपि सिंह, एसडीओ खगेशचंद्र झा के साथ ही कृष्णा कुमार, धर्मेंद्र कुमार, कोतवाली थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, कासिम बाजार थानाध्यक्ष....

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई एवं पूर्व एसपी लिपि सिंह द्वारा आदेश नहीं मानने पर गोली मारने के आदेश दिए जाने को लेकर स्थानीय अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है। शिकायत में लिपी सिंह और वर्तमान एसडीओ खगेशचंद झा सहित सात पुलिस अधिकारियों का उल्लेख है।

प्रभात खबर के अनुसार, वाद पत्र केलू यादव उर्फ ​​दयानंद कुमार ने अधिवक्ता निर्मल कुमार के माध्यम से दर्ज की है। यादव ने शिकायत दायर करते हुए विजयादशमी की रात हुई घटना और मामले की लीपापोती में लगी तत्कालीन एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों की कारगुजारियों का खुलासा किया है। साथ ही एसपी लिपि सिंह, एसडीओ खगेशचंद्र झा के साथ ही कृष्णा कुमार, धर्मेंद्र कुमार, कोतवाली थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, कासिम बाजार थानाध्यक्ष शैलेश कुमार, मुफस्सिल थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार को आरोपित ठहराया है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि 26 अक्टूबर को माता रानी का विसर्जन कराने के लिए निश्चित मार्गों से होते हुए एमसीएन चैनल स्थित तिनबटिया पर दुर्गा माता की प्रतिमा को रखा गया। घटना के वक्त भक्तों द्वारा माता की आरती की जा रही थी। उसी दौरान आरोपित वहाँ पहुँचे और कथित तौर पर अभद्रता करते, गाली देते हुए आयोजन को बर्बाद करने की धमकी दी। इतना ही नहीं फिर दुर्गा प्रतिमा को कंधा देने वाले कहार कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बेरहमी के साथ पीटना शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई और लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे।

हालाँकि, थोड़ी देर बाद फिर वहाँ सभी लोग एकत्रित होकर बड़ी दुर्गा प्रतिमा को कंधा देकर किसी तरह बाटा चौक के पास पहुँचे। बाटा चौक पर पर माता दुर्गा की महाआरती का समारोह होने वाला था। जैसे ही माँ दुर्गा की प्रतिमा को वहाँ रखा गया तुरंत ही दीनदयाल चौक से गोलियों की आवाजें आईं और वापस भगदड़ मच गया।

शिकायत पत्र में आगे बताया गया कि आरोपितों ने गाली देते हुए लोगों को मारने और बात नहीं मानने पर गोली मारने को कहा। वे लोग वादी सहित समिति के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पर लाठी-डंडा, बट से जान से मारने की नीयत से मारने लगे। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों को काफ़ी गंभीर चोटें आई। भक्त पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए, चूँकि यह खुद पुलिस से संबंधित था, इसलिए उन्हें वहाँ से भी गालियाँ देते हुए भगा दिया गया। जिसके बाद पीड़ितों ने न्यायालय के अवकाश खत्म होने के बाद न्यायालय में केस दर्ज करवाया। भक्तों ने सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग भी की।

विसर्जन के दौरान मुंगेर में हत्या

दुर्गा पूजा विसर्जन समारोह के दौरान बिहार के मुंगेर शहर में फैली हिंसा में एक भक्त की मौत हो गई। एसपी मुंगेर लिपि सिंह ने भक्तों पर पुलिस द्वारा की गई बर्बरता का बचाव किया था। जिसमें दावा किया गया कि भक्तों ने पथराव कर आगामी हिंसा को भड़काया। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ द्वारा किए गए पथराव से 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। सिंह ने आगे कहा कि भीड़ में से ही एक सदस्य ने गोलियाँ चलाईं जिस वजह से 18 वर्षीय भक्त की मौत हो गई।

वहीं CISF की रिपोर्ट में बताया गया कि दुर्गा पूजा जुलूस समारोह में उपस्थित लोगों पर पुलिस द्वारा पहली गोली चलाई गई थी। साथ ही दुर्गा पूजा में भाग लेने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए एसपी मुंगेर लिपि सिंह ने पहले जो दावा किया था, उसके विपरीत CISF की रिपोर्ट सामने है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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