Homeदेश-समाजओडिशा: भद्रक में दीवाली के दिन मिला प्राचीन शिवलिंग, पार्क बनाने के लिए हो...

ओडिशा: भद्रक में दीवाली के दिन मिला प्राचीन शिवलिंग, पार्क बनाने के लिए हो रही थी खुदाई

स्थानीय लोगों का मानना है कि अमावस्या के दिन शिवलिंग का मिलना काफी शुभ है। ओडिशा पोस्ट के अनुसार कुछ गाँववालों ने बताया, "कल अमावस्या का दिन था। ऐसे शुभ दिन में शिवलिंग और मूर्ति का मिलना और कुछ नहीं, बल्कि ईश्वर का आशीर्वाद है।"

दीवाली के दिन ओडिशा के भद्रक जिला स्थित गोरामाटी गाँव के मैदान में प्राचीन शिवलिंग खुदाई के दौरान मिली। रिपोर्टों के अनुसार, मैदान में एक पार्क बनाने के लिए खुदाई चल रही थी। इसी दौरान एक ट्रैक्टर किसी चट्टान से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गया।

जब कर्मियों ने चट्टान को ज़मीन से उखाड़ने की कोशिश की, तो पाया कि वह एक शिवलिंग है। मौके पर कई अन्य कलाकृतियाँ भी पायी गईं। कर्मियों ने तुरंत सरपंच तथा स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी दी।

स्थानीय लोग पूजा-अर्चना करने पहुँचे

निकटवर्ती गाँवों में शिवलिंग की खबर पहुँचते ही लोग भारी संख्या में मौके पर पहुँचे और पूजा-अर्चना की। हालाँकि यह शिवलिंग प्राचीन मालूम तो होता है, परन्तु विशेषज्ञों ने अब तक कोई परीक्षण नहीं किया है, जिससे इसकी सही उम्र का पता लगता हो। स्थानीय लोगों का मानना है कि अमावस्या के दिन शिवलिंग का मिलना काफी शुभ है। ओडिशा पोस्ट के अनुसार कुछ गाँववालों ने बताया, “कल अमावस्या का दिन था। ऐसे शुभ दिन में शिवलिंग और मूर्ति का मिलना और कुछ नहीं, बल्कि ईश्वर का आशीर्वाद है।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -