Homeदेश-समाजअब राज्यों के पुलिसकर्मी पहनेंगे एक जैसी वर्दी, 'वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म' पर...

अब राज्यों के पुलिसकर्मी पहनेंगे एक जैसी वर्दी, ‘वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म’ पर केंद्र सरकार ने 16 राज्यों से माँगी रिपोर्ट: जानें पुलिस वर्दी के रंगों का रोचक इतिहास

पीएम मोदी ने का कहना है कि जैसे देश में वन नेशन, वन राशन कार्ड, वन नेशन, वन मोबिलिटी कार्ड और वन नेशन, वन साइन लैंग्वेज की पहलें लागू की गईं, उसी तरह वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म पर भी सोचना चाहिए।

केंद्र सरकार अब पूरे देश में ‘वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म’ योजना को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस योजना के तहत देशभर में पुलिस की वर्दी को एक समान बनाने की तैयारी चल रही है। गृह मंत्रालय (MHA) ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उनकी पुलिस वर्दी से जुड़ी जानकारी माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्रालय ने राज्यों को 4 नवंबर 2025 तक वर्दी की डिजाइन, गुणवत्ता और लागत से संबंधित सभी विवरण भेजने के निर्देश दिए हैं। जिन राज्यों से जानकारी माँगी गई है, उनमें आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह जानकारी सिपाही से लेकर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) तक के सभी रैंकों की वर्दी से जुड़ी होनी चाहिए। साथ ही हर रैंक के लिए तय वार्षिक वर्दी भत्ता और पूरी वर्दी की औसत लागत का ब्योरा भी देने को कहा गया है। सरकार का उद्देश्य है कि देशभर में पुलिस की वर्दी एक जैसी हो, जिससे एक समानता और एकता की भावना मजबूत हो।

प्रधानमंत्री ने प्रस्तुत किया विचार, बताए फायदे

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2022 में हरियाणा के फरीदाबाद में आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी राज्यों के गृह मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए ‘वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म’ (एक देश, एक पुलिस वर्दी) का विचार प्रस्तुत किया था।

उन्होंने कहा कि यह कोई थोपने वाला विचार नहीं है बल्कि इस पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा था कि जैसे देश में वन नेशन, वन राशन कार्ड, वन नेशन, वन मोबिलिटी कार्ड और वन नेशन, वन साइन लैंग्वेज की पहलें लागू की गईं, उसी तरह वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म पर भी सोचना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने समझाया कि अगर पूरे देश में पुलिस की वर्दी एक जैसी होगी, तो इससे कई फायदे होंगे, बेहतर गुणवत्ता की यूनिफॉर्म बड़े पैमाने पर तैयार की जा सकेगी और पुलिस की पहचान पूरे देश में एक जैसी दिखेगी। उन्होंने कहा, “जिस तरह लाल और काले रंग के पोस्ट बॉक्स को लोग दूर से पहचान लेते हैं, उसी तरह एक समान वर्दी से पुलिस की अलग और स्पष्ट पहचान बनेगी।”

वर्तमान में देश की ज्यादातर पुलिस बल खाकी रंग की वर्दी पहनते हैं जबकि कोलकाता, तमिलनाडु और गोवा पुलिस सफेद वर्दी का इस्तेमाल करती है।

सम्मेलन में नागालैंड के उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्री वाई. पैटन ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार के कारण केंद्र सरकार ने सात जिलों के 15 पुलिस थानों के इलाकों से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटा लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में राज्य के और क्षेत्रों से भी AFSPA हटाया जाएगा।

पुलिस की वर्दी का इतिहास

भारत में पुलिस वर्दी का इतिहास उतना ही दिलचस्प है जितनी उसकी पहचान। अंग्रेजी राज के दौर में जब पुलिस बल की स्थापना हुई, तब उसकी वर्दी सफेद रंग की थी, जो शाही और सभ्य मानी जाती थी। लेकिन जल्द ही अंग्रेज अधिकारियों को अहसास हुआ कि सफेद कपड़े पर जरा सी गंदगी भी साफ दिखती थी, जिससे वर्दी की चमक बनाए रखना मुश्किल हो गया।

इस चुनौती ने एक नए विचार को जन्म दिया। 19वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश सैनिकों ने अपनी वर्दी को धूल जैसे रंगों में रंगना शुरू किया, ताकि यह वातावरण से मेल खा सके और गंदगी छिपी रहे। उन्होंने चाय की पत्तियों, गंदे पानी और कत्थे जैसे प्राकृतिक पदार्थों से प्रयोग किए। इन रंगों के मेल से बना ‘खाकी’ जिसका मतलब ही है धूल या मिट्टी जैसा।

सर हैरी बर्नेट लम्सडेन ने 1847 में इसे पहली बार औपचारिक रूप से वर्दी के रूप में अपनाया। वहीं, सर हेनरी लॉरेंस, जो उस समय लाहौर में ‘कोर ऑफ गाइड फोर्स’ के प्रमुख थे, उन्होंने इस व्यावहारिक रंग की उपयोगिता को देखते हुए इसे पुलिस की आधिकारिक वर्दी घोषित कर दिया।

इस तरह, भारत में खाकी का जन्म हुआ। एक ऐसा रंग जो न सिर्फ उपयोगी था बल्कि सादगी और दृढ़ता का प्रतीक भी बन गया। समय के साथ चाय और कत्थे से बना प्राकृतिक खाकी अब सिंथेटिक रंगों से तैयार किया जाने लगा। यह हल्के भूरे और पीले रंग का मिश्रण होता है, ऐसा रंग जो न ज्यादा चमकीला है, न ज्यादा फीका, पर बिल्कुल भरोसेमंद।

वर्दी के रंग में हुए दिलचस्प बदलाव

सालों के सफर में अलग-अलग राज्यों ने अपनी पुलिस वर्दी में कई प्रयोग किए। दिल्ली पुलिस ने खाकी में हल्का बदलाव लाने की कोशिश की, जिसके बाद कार्गो पैंट और टी-शर्ट का ट्रायल हुआ, मगर नई वर्दी अभी आधिकारिक रूप से लागू नहीं हो पाई। वहीं कोलकाता पुलिस परंपरा निभाते हुए आज भी सफेद वर्दी पहनती है।

गोवा पुलिस ने एक समय खाकी छोड़कर नेवी ब्लू ट्राउजर और सफेद शर्ट अपनाई। यह डिजाइन अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर वेंडेल रॉड्रिक्स ने तैयार किया था। हालाँकि बाद में खाकी वर्दी वापस लौटी, पर ट्रैफिक पुलिस आज भी वही आधुनिक डिजाइन पहनती है।

हिमाचल प्रदेश ने 2008 में नीली वर्दी का प्रयोग किया लेकिन कुछ ही वर्षों में खाकी की गरिमा लौट आई। वहीं, महाराष्ट्र पुलिस ने 2020 में खाकी के लिए एक मानक रंग कोड (Pantone 18-1022 TCX) तय किया जिससे राज्य में एक जैसी वर्दी सुनिश्चित हो सके।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
ख़ुद को तराशने में मसरूफ़

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जिनके राज में नेताओं की भैंस ढूँढती थी पुलिस, वो अखिलेश दे रहे कानून-व्यवस्था पर ज्ञान: पढ़िए- कैसे सपा शासन में बाहुबलियों से लेकर...

सपा सरकार में यूपी पुलिस के हर थाने को ये आदेश था कि किसी भी मामले में एक जाति विशेष और धर्म विशेष लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखा जाएगा।

बांद्रा के गरीब नगर में चला बुलडोजर, फिर चर्चा में आए सुनील दत्त: पढ़ें- जब अभिनेता और कॉन्ग्रेस नेता पर लगे थे अवैध बस्तियों...

मुंबई के बांद्रा में बुलडोजर एक्शन के दौरान हिंसा। जानें- रेलवे प्रोजेक्ट, सुनील दत्त के पुराने कनेक्शन और धारावी जैसी राजनीति की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -