Homeदेश-समाजतृणमूल सांसद शताब्दी रॉय ने ED को लौटाए ₹30 लाख, सारधा चिट फंड के...

तृणमूल सांसद शताब्दी रॉय ने ED को लौटाए ₹30 लाख, सारधा चिट फंड के प्रचार के लिए मिले थे

इससे पहले अभिनेता और तृणमूल के राज्यसभा सांसद रह चुके मिथुन चक्रवर्ती भी सारधा के प्रचार के लिए मिले ₹1.16 करोड़ ED को 2015 में लौटा चुके हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद और बांग्ला फिल्मों की अदाकारा शताब्दी रॉय ने ₹30.64 लाख प्रवर्तन निदेशालय (ED) को लौटा दिए हैं। उन्हें यह पैसे सारधा ग्रुप के ब्रांड अंबेसडर के तौर पर उसका प्रचार करने के लिए मिले थे। ED के सूत्रों ने मीडिया को इस खबर की पुष्टि की है कि किसी ‘संदेशवाहक’ के ज़रिए ED अधिकारियों को इस रकम का ड्राफ्ट 2 सितंबर (सोमवार) को प्राप्त हुआ था।

करार था ₹49 लाख का, लेकिन बाकी टैक्स कटा

जब सारधा में यह घोटाला चल रहा था और लोगों की गाढ़ी कमाई ऊँचे रिटर्न का सब्जबाग दिखाकर लूटी जा रही थी, उसी काल खंड में सारधा ग्रुप की ब्रांड अंबेसडर बनने के लिए रॉय ने ₹49 लाख का करार किया था। लेकिन उनका दावा है कि सारधा ने उनके खाते में ₹30.64 लाख ही डाले, और बाकी की रकम टैक्स में ही कट गई। वही रकम वह अब लौटा रहीं हैं। उनके पहले अभिनेता और तृणमूल के राज्यसभा सांसद रह चुके मिथुन चक्रवर्ती भी सारधा के प्रचार के लिए मिले ₹1.16 करोड़ ED को 2015 में लौटा चुके हैं।

₹200 अरब का घोटाला

200 के करीब विभिन्न कंपनियों के एकत्रित होने (consortium) से बने सारधा ग्रुप पर आरोप है कि इसने लाखों छोटे निवेशकों से लगभग ₹200 अरब लूटे। 2013 में यह ग्रुप ठप्प हो गया, और एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को राज्य की SIT से इसकी जाँच का ज़िम्मा अपने ऊपर ले लेने का निर्देश दिया। इसके बाद से कोलकाता के चोटी के पुलिस अधिकारी राजीव कुमार से लेकर के तृणमूल नेताओं डेरेक ओ’ब्रायन और पार्थ चटर्जी से लेकर के बांग्ला फिल्मों के कई अभिनेताओं जैसे ऋतुपर्णा सेनगुप्ता, प्रसेनजित चटर्जी, मदन मित्रा आदि इस मामले में ED के समन पा चुके हैं। सीबीआई ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी मामले की जाँच में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया है

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -