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दिवाली के ‘पटाखों’ से पहले ही दमघोंटू हो गई दिल्ली, जानिए कैसे अगले 3 दिनों में पराली से और बिगड़ेगी हवा

हाल ही में पटाखों पर प्रतिबंध पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखे अस्थायी मुद्दा हैं, जबकि पराली जलाना मुख्य मुद्दा है। यह स्वीकार करते हुए कि अदालत को इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, जस्टिस एमआर शाह और एएस बोपन्ना की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि वे दीवाली की छुट्टी के बाद इस मुद्दे को सुनवाई के लिए उठाएँगे।

ठंड का मौसम आते ही देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बनकर उभरता है। दिल्ली में स्मॉग छा जाने से लोगों को साँस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। किसानों द्वारा पराली जलाया जाना इसकी सबसे बड़ी वजह है। इसी क्रम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बुलेटिन जारी किया है। बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक बुधवार को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 314 रहा, जिसमें पीएम 10 और पीएम 2.5 मुख्य प्रदूषक रहे। इससे पहले मंगलवार को यह आँकड़ा 303 से कुछ डिग्री अधिक था। बुधवार को दिल्ली ही नहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बुलंदशहर और नोएडा समेत कई हिस्सों में AQI ‘बहुत खराब’ दर्ज किया गया। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार, गुरुवार से हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है।

माना जा रहा है कि एक्यूआई गुरुवार को ‘बेहद खराब’ श्रेणी के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच सकता है। पराली जलाने के कारण दिल्ली में पीएम 2.5 में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके अलावा, प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान बुधवार के लगभग 8% से बढ़कर गुरुवार को अनुमानित 20% हो सकता है। हवा के उत्तर-पश्चिमी दिशा में हुए बदलाव को इसका कारण माना जा रहा है।

दिल्ली के उत्तर-पश्चिम से आने वाली हवाएँ पराली जलाए जाने वाली हॉटस्पॉट पंजाब और हरियाणा से प्रदूषक हवाएँ लाती हैं। SAFAR के पूर्वानुमान में कहा गया है कि शुक्रवार और शनिवार को प्रदूषण में पराली का शेयर 35 से 45 फीसदी तक पहुँच सकता है। ऐसे में पटाखों के कारण दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 4 से 6 नवंबर के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच सकता है।

हाल ही में पटाखों पर प्रतिबंध पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखे अस्थायी मुद्दा हैं, जबकि पराली जलाना मुख्य मुद्दा है। यह स्वीकार करते हुए कि अदालत को इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, जस्टिस एमआर शाह और एएस बोपन्ना की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि वे दीवाली की छुट्टी के बाद इस मुद्दे को सुनवाई के लिए उठाएँगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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