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LS चुनाव में ‘हमारे पक्ष में’ परिणाम और मस्जिदों की सुरक्षा के लिए पढ़े जाएँ विशेष नमाज़: देवबंद

"अभी जैसी परिस्थितियाँ बन रही हैं, ऐसे समय में ज़रूरी है कि देश की शांति व समृद्धि के लिए नमाज़ पढ़ी जाए। मस्जिदों और इस्लामिक शिक्षकों की सुरक्षा के लिए भी यह महत्वपूर्ण है।"

अजीबोगरीब फतवों के लिए मशहूर इस्लामिक यूनिवर्सिटी दारुल उलूम देवबंद ने भी लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों में रूचि दिखानी शुरू कर दी है। इस्लामिक संस्था ने मतगणना के ‘ख़ास परिणामों’ के लिए नमाज़ का आयोजन किया। रविवार (मई 19, 2019) को एग्जिट पोल्स के माध्यम से विभिन्न न्यूज़ एजेंसियों ने चुनाव परिणाम का अनुमान लगाया। अधिकांश एग्जिट पोल्स में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है। ऐसे में दारुल उलूम देवबंद एग्जिट पोल्स के नतीजों से ख़ुश नहीं है। नाराज़ मुफ़्ती महमूद हसन बुलंशहरी ने कहा, “अभी जैसी परिस्थितियाँ बन रही हैं, ऐसे समय में ज़रूरी है कि देश की शांति व समृद्धि के लिए नमाज़ पढ़ी जाए। मस्जिदों और इस्लामिक शिक्षकों की सुरक्षा के लिए भी यह महत्वपूर्ण है।

मुफ़्ती ने आगे कहा कि आपको इस बात का थोड़ा भी अंदाज़ा नहीं होता कि किसकी प्रार्थना सुनी जा रही है और देश बेहतरी की ओर बढ़ने लगे। उन्होंने सभी संस्थाओं से चुनाव परिणाम ज़ारी होने तक नियमित नमाज़ के बाद ‘ख़ास परिणाम’ के लिए अलग से प्रार्थनाएँ आयोजित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रार्थनाएँ 3 दिन पहले ही शुरू हो जानी चाहिए। मुफ़्ती ने संस्था के अनुयायियों से अपने पापों के लिए प्रायश्चित करने को कहा और बताया कि आजकल समाज में लालच की भावना बढ़ रही है।

देवबंद के मौलवियों ने मुफ़्ती के सुझाव को गंभीरता से लेते हुए इसका स्वागत किया है और ‘अपने पक्ष में’ चुनाव परिणाम हासिल करने के लिए प्रार्थनाओं का सिलसिला शुरू कर दिया है। मौलाना इशाक़ गोरा ने मुफ़्ती के सुझाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी मुस्लिमों को मज़हबी रूप से उनके सुझाव पर अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे लोकसभा चुनाव के परिणामों को लेकर आशंकित हैं। उन्होंने आगे कहा:

हमारे देश को एक ऐसी सरकार की ज़रूरत है जो सबको साथ लेकर चले और भाईचारा, शांति और समरसता को बढ़ावा दे। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, कुछ राजनीतिक पार्टियाँ ऐसी हैं जो धर्म के आधार पर राजनीति करती हैं। ये सही नहीं है और ऐसी पार्टियों को जाना पड़ेगा। इसीलिए मुफ्ती ने जो प्रार्थनाओं की बात कही है, उसे गंभीरता से लेना चाहिए।

हाल ही में विवादित इस्लामिक संस्था देवबंद ने एक फतवे में औरतों के रमजान माह की विशेष नमाज तरावीह की जमात करने और मस्जिद में तरावीह की नमाज़ पढ़ने को ग़लत करार दिया था। देवबंद का तर्क था कि जब नमाज़ पढ़ने के लिए महिलाएँ मस्जिद नहीं जा सकतीं तो तरावीह के लिए उन्हें इजाज़त कैसे दे दी जाए। मुफ़्तियों ने कहा कि महिलाओं को तरावीह की नमाज़ घर के भीतर एकांत में अदा करनी चाहिए। इसके अलावा हाल में एक अन्य अजीब फतवा भी जारी किया गया।

हाल ही में दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी करते हुए पवित्र रमजान महीने में तरावीह की नमाज़ के दौरान लाइट बंद कर अंधेरा करने को ग़लत करार दिया। मस्जिदों में बिजली गुल कर अंधेरे या मध्यम रोशनी में नमाज़ अदा करने को मुफ्ती-ए-कराम ने रस्मन और ग़लत करार दिया। मुफ़्तियों ने मजहब के लोगों से इस्लाम में ईजाद की जा रही ‘नई-नई रस्मों एवं रिवाजों’ से बचने की सलाह दी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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