मुमताज हॉस्टल में फंदे से लटका मिला अनस: AMU के छात्रों ने काटा बवाल, SP की गाड़ी में तोड़फोड़

छात्रों ने पहले एसपी सिटी की गाड़ी देख नारेबाजी की और फिर उन पर हमला बोला। बवाल बढ़ता देख अधिकारी को लौटना पड़ा। लेकिन छात्रों की भीड़ उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ी और पत्थर फेंककर गाड़ी का शीशा तोड़ डाला।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) रात एक छात्र ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। छात्र का शव मुमताज हॉस्टल के रूम में मिला। प्रशासन और पुलिस की देरी से पहुँचने पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आक्रोशित छात्रों ने पुलिस को ही दौड़ा लिया। बताया जा रहा है इस दौरान छात्रों ने एसपी की गाड़ी पर पत्थरबाजी भी की। बाद में कैंपस के बाहर पुलिस फोर्स तैनात की गई, लेकिन हंगामा देर रात तक जारी रहा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक छात्र का नाम मो. अनस शम्सी है। अनस, प्रदेश के पीलीभीत इलाके का रहने वाला था। वो एएमयू में एमएसडब्लू की पढ़ाई पूरी कर चुका था और अब पीएचडी की तैयारी में जुटा था। अनस मुमताज हॉस्टल में अपने तीन साथियों के साथ कमरा नंबर 22 में रहता था। लेकिन मंगलवार की रात जब उसका एक रूम पार्टनर अपने कमरे में पहुँचा तो वह फंदे पर लटका मिला। ये देखते ही अनस के रूम पार्टनर ने शोर मचा दिया और सारे छात्र जुट गए। फंदे से शव को उतारा गया और प्रॉक्टर टीम को सूचना दी गई।

मो. अनस शम्सी

हंगामा कर रहे छात्रों का आरोप है कि काफी देर बीत जाने के बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी समय से नहीं पहुँचा। जिस कारण सभी छात्र गुस्से में आए। इसके बाद छात्र खुदकुशी की जानकारी मिलते ही एएमयू कैंपस में पहुँचे एसपी सिटी अभिषेक पर भी छात्रों ने अपना गुस्सा उतारा।

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आक्रोशित छात्रों ने पहले एसपी सिटी की गाड़ी देखकर नारेबाजी शुरू कर दी और फिर उनपर हमला बोला। बवाल अधिक होने के कारण उन्हें वापस होना पड़ा। लेकिन छात्रों की भीड़ उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ी और पत्थर फेंककर उनकी गाड़ी का शीशा तोड़ डाला। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों ने एसपी की गाड़ी को कैंपस से बाहर निकलवाया।

एएमयू प्रशासन के पहुँचने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया और देर रात तक थाना सिविल लाइल पुलिस द्वारा पोर्टमार्टम कराए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाती रही। आत्महत्या का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। जाँच जारी है।

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मीडिया गिरोह ऐसे आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले। बरखा दत्त का ट्वीट इसकी प्रतिध्वनि है। यूॅं ही नहीं कहते- तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ।

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