Tuesday, November 30, 2021
Homeदेश-समाजलखनऊ इमामबाड़ा में 'छोटे कपड़ों' में नहीं मिलेगी एंट्री, मौलवियों ने कहा यह कोई...

लखनऊ इमामबाड़ा में ‘छोटे कपड़ों’ में नहीं मिलेगी एंट्री, मौलवियों ने कहा यह कोई पर्यटन स्थल नहीं

शिया समुदाय के साथ हुई बैठक के बाद जिला प्रशासन ने फरमान जारी किया कि छोटे कपड़े पहनने वाली कोई भी लड़की या महिला इमामबाड़े के परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगी।

अब लखनऊ के इमामबाड़े में लड़कियों के कपडे देख कर उन्हें एंट्री दी जाएगी। जहाँ दुनियाभर में महिलाओं को समानता का अधिकार दिए जाने वाली बात की जा रही है, इमामबाड़े का यह निर्णय हैरान कर देने वाला है। मुस्लिम धर्मगुरुओं के सुझावों के बाद जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। कोई भी महिला अब शॉर्ट्स पहन कर इमामबाड़े के परिसर में नहीं घुस सकेगी। इसकी निगरानी की ज़िम्मेदारी सिक्योरिटी गार्ड्स को सौंपी जाएगी। इमामबाड़े के परिसर में अब प्रोफेशनल शेयरिंग और फोटोग्राफी भी नहीं होगी। इन सब पर रोक लगा दिया गया है। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएँगे।

शिया समुदाय के साथ हुई बैठक के बाद जिला प्रशासन ने फरमान जारी किया कि छोटे कपड़े पहनने वाली कोई भी लड़की या महिला इमामबाड़े के परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगी। जिला प्रशासन के अनुसार, इमामबाड़े की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि वहाँ शार्ट स्कर्ट्स और छोटे कपड़े पहनने वाली महिलाओं की एंट्री प्रतिबंधित की जाएगी। अब पर्यटकों को भी पूरे कपड़े पहनने होंगे।

जिला प्रशासन ने कहा है कि गार्ड्स को इस बात के लिए अनुमति दे दी गई है कि वे ‘धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाले और अश्लील’ कपड़ों में किसी भी पर्यटक को अंदर न घुसने दें। पर्यटकों को ‘गरिमामय’ कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा कि बार-बार ये शिकायतें आ रही थीं कि लोग बड़े एवं छोटे इमामबाड़े में ‘अशोभनीय’ कपड़े पहन कर आ रहे हैं। इसके बाद नाराज़ शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं ने पीएम मोदी व सीएम योगी को पत्र लिख कर मामले से अवगत कराया। शिया धर्मगुरुओं ने माँग की कि इमामबाड़े में भी स्वर्ण मंदिर की तरह ही ड्रेस कोड लागू किया जाए।

बैठक में हुसैनाबाद एलाइड ट्रस्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मौलवियों का कहना है कि बड़ा इमामबाड़ा कोई पर्यटन स्थल नहीं है। यह 235 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत है। इस धरोहर का अपना इतिहास है। यह मुस्लिमों की भावनाओं से जुड़ा स्थल है। इसलिए इसकी धार्मिक पवित्रता को बनाए रखना जरूरी है। सारे मौलवी इस बात से भी नाराज़ हैं कि इमामबाड़ा परिसर में युवा जोड़े एक-दूसरे से प्यार का इजहार करते नज़र आते हैं।

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘UPTET के अभ्यर्थियों को सड़क पर गुजारनी पड़ी जाड़े की रात, परीक्षा हो गई रद्द’: जानिए सोशल मीडिया पर चल रहे प्रोपेगंडा का सच

एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि ये उत्तर प्रदेश में UPTET की परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की तस्वीर है।

बेचारा लोकतंत्र! विपक्ष के मन का हुआ तो मजबूत वर्ना सीधे हत्या: नारे, निलंबन के बीच हंगामेदार रहा वार्म अप सेशन

संसद में परंपरा के अनुरूप आचरण न करने से लोकतंत्र मजबूत होता है और उस आचरण के लिए निलंबन पर लोकतंत्र की हत्या हो जाती है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
140,538FollowersFollow
412,000SubscribersSubscribe