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ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान अभी भी लापता, 14 FIR के संबंध में 122 गिरफ़्तारी: संयुक्त किसान मोर्चा का दावा

किसान नेताओं ने दावा किया है, "14 एफआईआर के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 122 किसानों को गिरफ्तार किया है। संयुक्त मोर्चा गिरफ्तार किसानों को कानूनी और वित्तीय सहायता देगा।"

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर 75 दिनों से अधिक समय से किसान आंदोलन जारी है। 26 जनवरी के मौके पर किसानों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया था, जिसकी आड़ में किसानों ने राष्ट्र की राजधानी में जमकर उत्पात मचाया। अब किसान नेताओं ने दावा किया कि ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान अभी भी लापता हैं।

दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार (13 फरवरी, 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया है कि किसानों को फर्जी मामलों में फँसाया जा रहा है, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। किसानों ने तय कर लिया है कि अब वो यहीं रहेंगे। आंदोलन बंद नहीं होगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया, “26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में शामिल हुए 16 किसान अब भी लापता हैं। गणतंत्र दिवस की घटना की न्यायिक जाँच होनी चाहिए।” किसान नेताओं ने दावा किया है, “14 एफआईआर के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 122 किसानों को गिरफ्तार किया है। संयुक्त मोर्चा गिरफ्तार किसानों को कानूनी और वित्तीय सहायता देगा।”

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “भारत सरकार झूठ बोलकर सारे देश को गुमराह कर रही है। सरकार कह रही है कि हमें बताया नहीं जा रहा कि इन क़ानूनों में काला क्या है, सरकार के साथ 11 बैठक करके 3 बार एक-एक क्लॉज पर बता चुके हैं कि इनमें काला क्या है।”

वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस पर कहा, “ये आंदोलन जन मुक्ति आंदोलन है, लोग बंधक हैं उनको रिहा कराना है, इसी वजह से महापंचायत की जा रही है।” बता दें इतने दिनों से चल रहे आंदोलन पर कई तरह के सवाल उठने लग गए है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं पर इसकी फंडिंग को लेकर उनकी संपत्तियों का ब्यौरा भी इकट्ठा किया जा रहा। जिस पर टिकैत ने कहा, “मुझे नहीं पता कितने की प्रॉपर्टी बताई गई है, मेरे पास तो कुछ नहीं है।”

राकेश टिकैत ने कहा, “संयुक्त किसान मोर्चा पूरी तरह से एकजुट है। 23 फरवरी तक के कार्यक्रम निर्धारित हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं। आंदोलन पूरी मजबूती से चलता रहेगा, हम अपनी रणनीति बना रहे हैं। किसानों को हताश होने की जरूरत नहीं है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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