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बिहार के होनहार युवा प्लास्टिक कचरे से बना रहे पेट्रोल-डीजल, एक लीटर की लागत ₹62: चालू हुआ प्लांट

मुजफ्फरपुर के खरौना गाँव में इसका एक प्लांट 2 नवंबर से शुरू हो गया है। इस प्लांट पर 8 युवाओं की टीम ने मिलकर प्लास्टिक कचरे से बायो पेट्रोल और डीजल बनाने का काम शुरू कर दिया है।

पेट्रोल-डीजल के महँगे दामों से आम आदमी की जेब पर खासा असर पड़ा है, लेकिन अब आपको इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि बिहार के होनहार युवाओं ने एक अनोखा फॉर्मूला ईजाद किया है। उन्होंने प्लास्टिक कचरे से ईंधन तैयार किया है। इससे ना केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य को भी खराब होने से बचाया जा सकेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के मुजफ्फरपुर के युवाओं की एक टीम ने कूड़े में फैंके जाने वाले प्लास्टिक से पेट्रोल और डीजल तैयार किया है। मुजफ्फरपुर के खरौना गाँव में इसका एक प्लांट 2 नवंबर से शुरू हो गया है। इस प्लांट पर 8 युवाओं की टीम ने मिलकर प्लास्टिक कचरे से बायो पेट्रोल और डीजल बनाने का काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस टीम का नेतृत्व भारतीय सांख्यिकी संस्थान के छात्र आशुतोष मंगलम कर रहे हैं। उनके साथ इस टीम में शिवानी, सुमित कुमार, अमन कुमार और मोहम्मद हसन आदि शामिल हैं। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर 2019 में इस टेक्नोलॉजी का ट्रायल किया था और सफलता मिलने पर 2020 में इसका पेटेंट कराया।

इस प्लांट में एक लीटर बायो डीजल तैयार करने की लागत 62 रुपए आएगी। वहीं बात करें इसकी बिक्री तो यह 70 रुपए प्रति लीटर पर की जा सकेगी। ये यूनिट रोजाना 200 किग्रा प्लास्टिक कचरे से 175 लीटर बायो पेट्रोल-डीजल तैयार करेगी। प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल और डीजल बनाने की इस प्रोसेस का पेटेंट ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी के नाम पर है।

बता दें कि केंद्र सरकार की योजना पीएमईजीपी (PMEGP) के तहत 25 लाख रुपए लोन लेकर ये फैक्टरी खोली गई है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक पीके सेना ने कहा कि इस इकाई की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की जा चुकी है। एमडीएम गणेश दत्त शर्मा ने बताया कि अनुदानित ब्याज पर इकाई खोलने के लिए लोन उपलब्ध कराया गया है। इससे कई लोगों को रोजगार मिलेगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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