लद्दाख में क्रैश हुआ आर्मी का हेलीकॉप्टर, बाल-बाल बचे 3 ऑफिसर: इंफैंट्री डिवीजन 3 के GOC भी थे सवार

लद्दाख के दुर्गम तांगत्से क्षेत्र में भारतीय सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारी सवार थे, हालाँकि तीनों अधिकारी बाल-बाल बच गए। यह हादसा बुधवार (20 मई 2026) को लेह के पास हुआ, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि बाद में की गई।

दुर्घटना में सेना के 3 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल सचिन मेहता, एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर घायल हुए हैं। सभी अधिकारियों को चोटें आईं, लेकिन वे सुरक्षित बच गए। हादसे के बाद सोशल मीडिया पर दुर्घटनास्थल की तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं, जिनमें अधिकारी हेलीकॉप्टर के मलबे के पास बैठे दिखाई दिए।

कठिन पहाड़ी इलाके और ऊँचाई वाले मौसमीय हालात को देखते हुए इसे चमत्कारिक बचाव माना जा रहा है। सेना ने मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं।

चीता हेलीकॉप्टर पर फिर उठे सवाल

दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर सेना के पुराने चीता बेड़े का हिस्सा था, जो पिछले कई दशकों से भारतीय सेना की सेवा में है। 1970 के दशक में शामिल किए गए ये हेलीकॉप्टर खासतौर पर ऊँचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन के लिए जाने जाते हैं। सियाचिन ग्लेशियर में 1984 के ऑपरेशन मेघदूत के दौरान भी इनकी अहम भूमिका रही थी।

हालाँकि हाल के वर्षों में चीता हेलीकॉप्टर कई हादसों का शिकार हुए हैं, जिनमें कई सैन्य कर्मियों की जान भी गई। ताजा हादसे के बाद एक बार फिर इन हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा और उनकी सेवा अवधि को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

नए हेलीकॉप्टरों से बदलेगी तस्वीर

भारतीय सेना अब पुराने चीता हेलीकॉप्टरों की जगह स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) को शामिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित यह हेलीकॉप्टर खास तौर पर कठिन और ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।

सेना ने सीमित संख्या में LUH के ऑर्डर भी दिए हैं। माना जा रहा है कि इससे सेना को बेहतर सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और अधिक भरोसेमंद ऑपरेशनल क्षमता मिलेगी। बावजूद इसके, चीता हेलीकॉप्टर आज भी दुनिया के सबसे प्रभावी हाई-एल्टीट्यूड हेलीकॉप्टरों में गिने जाते हैं, लेकिन लद्दाख हादसे ने इनके जल्द प्रतिस्थापन की जरूरत को और तेज कर दिया है।