दिल्ली में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री से बातचीत हो रही थी, और ठीक उसी वक्त उनकी राजधानी काबुल धमाकों से दहल उठी। शनिवार और शुक्रवार (9 अक्तूबर – 10 अक्तूबर) की रात काबुल में कई विस्फोट और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। सोशल मीडिया पर तुरंत आरोप लगने लगे और लोगों ने इन हमलों के पीछे पड़ोसी पाकिस्तान का हाथ होने का शक जताया।
ऐसा लग रहा है मानो अफगानिस्तान का भारत के साथ बढ़ता मेल-जोल पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा। इससे पहले बुधवार (8 अक्तूबर 2025) को पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में TTP के हमले में पाक फौज के 11 फौजी भी मारे गए। सीमा विवाद को लेकर पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं, और इन घटनाओं ने क्षेत्रीय माहौल को और गरमा दिया है।
??? अफगान विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी के दिल्ली दौरे से पाकिस्तान का फ्रस्ट्रेशन चरम पर…
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) October 10, 2025
दौरे के दौरान के पाकिस्तानी जेट्स ने काबुल पर बमबारी की।
? बमबारी के बाद पाकिस्तान ने TTP चीफ मुफ्ती नूर वली मेहसूद के मारे जाने का दावा किया।
इस घटना के तुरंत बाद TTP ने मुफ्ती… pic.twitter.com/UFdRAA5lj6
काबुल में विस्फोट और पाक पर आरोप
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में शनिवार और शुक्रवार की रात को कई धमाके और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। हताहतों की संख्या अभी साफ नहीं हो पाई है। सोशल मीडिया पर अज्ञात विमानों से संभावित हवाई हमले होने के दावे किए गए हैं। कुछ हैंडल्स ने इन हमलों में पाकिस्तान का हाथ होने का शक जताया।
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि धमाकों की जाँच शुरू कर दी गई है। ये विस्फोट उस समय हुए जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर हैं। मुत्ताकी की छह दिवसीय यात्रा का मकसद राजनयिक मान्यता प्राप्त करने के लिए भारत के साथ संबंध बेहतर करना है।
इन धमाकों के पीछे पाकिस्तान की संभावित भूमिका का दावा इसलिए हो रहा है क्योंकि सीमा विवाद के चलते तालिबान और पाक सरकार के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में आरोप लगाया कि अफगानिस्तान का अंतरिम प्रशासन पाकिस्तान के खिलाफ TTP का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अफगानिस्तान ने TTP आतंकियों को दूर रखने के लिए पाकिस्तान से फंड माँगा था।
पाकिस्तान में मुठभेड़ और हताहत
पाकिस्तानी फौज के मुताबिक, यह मुठभेड़ बुधवार (8 अक्टूबर 2025) को हुई। यह इलाका अफगान सीमा से सटा ओरकजई जिला है। फौज वहाँ खुफिया ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान, प्रतिबंधित समूह ‘खवारिज’ (पाकिस्तान तालिबान TTP) के लड़ाकों के साथ जमकर गोलीबारी शुरू हो गई।
इस हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल जुनैद आरिफ और मेजर तैय्यब राहत सहित कुल 11 फौजी मारे गए। लड़ाकों ने पहले सड़क किनारे रखे बम (IED) से फौज के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP हमलों की योजना बनाने के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करता है। साथ ही, पाकिस्तान भारत पर भी TTP को समर्थन देने का आरोप लगाता है, हालाँकि, भारत इन आरोपों से साफ इनकार करता है।

