जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा देकर भी अभी नहीं छोड़ा पद, महीने भर बाद भी बने हुए हैं इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज: जानिए क्या है वजह

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे चुके जस्टिस यशवंत वर्मा अभी भी जज हैं। उन्होंने 9 अप्रैल 2026 को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया था, लेकिन हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उनका नाम एक महीने बाद भी मौजूद है।

जस्टिस वर्मा के नाम से पहले जस्टिस एमसी त्रिपाठी, अरिंदम सिन्हा और रंजन रॉय के नाम हैं। दरअसल उन्होंने इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज तो दिया था, लेकिन ये इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

अपने इस्तीफे में यशवंत वर्मा ने कहा था कि तत्काल प्रभाव से वह अपना पद छोड़ रहे हैं। उस वक्त घर से कैश बरामदगी के बाद संसद में महाभियोग प्रक्रिया को लेकर बात चीत चल रही थी।

कोर्ट ने जज के इस्तीफा देने के मामले पर क्या कहा है?

संविधान के अनुच्छेद 217 (1) के मुताबिक, जब कोई जज अपना इस्तीफा खुद साइन कर राष्ट्रपति को भेज देता है तो उसका इस्तीफा मान लिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 1978 को गोपालचंद्र मिश्रा केस में बताया था कि इस्तीफा कैसे प्रभावी होता है।

5 जजों की खंडपीठ ने कहा था कि जब कोई जज अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज देता हो मान लिया जाता है कि अब ह जज नहीं रहा। लेकिन जज ने अपने इस्तीफे का प्रभावी डेट बाद की डाली थी इसलिए तारीख आने से पहले वह अपना इस्तीफा वापस ले सकता है। हालाँकि जस्टिस यशवंत वर्मा केस में ‘तत्काल प्रभाव’ से इस्तीफे की बात कही गई है।

क्या था जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला

जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से कथित तौर पर जले हुए नोट और नकदी मिलने का मामला सामने आया था। इसके बाद उन्हें हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया पर चर्चा शुरू हुई थी। बताया जाता है कि आवास पर आग लगने की एक घटना के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य सबूतों के सामने आने के बाद उन्होंने जाँच प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया और इस्तीफा सौंप दिया।