अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों को बेवकूफ बनाकर लिए एडमिशन, NAAC मान्यता का भी किया फर्जी दावा: लाल किला कांड से जुड़े आतंकियों का था ठिकाना, कोर्ट में बयान हो रहे दर्ज

दिल्ली पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ पूर्व छात्रों के खुलासे वाले बयान साकेत कोर्ट में दाखिल कर दिए हैं। आठ पूर्व छात्रों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में एडमिशन इसलिए लिया क्योंकि वेबसाइट और प्रचार सामग्री में दावा किया गया था कि यह NAAC से मान्यता प्राप्त है। वास्तव में B.Ed डिग्री कॉलेज की NAAC मान्यता 2016 में और इंजीनियरिंग कॉलेज की 2019 में समाप्त हो चुकी थी। छात्रों ने कहा कि NAAC मान्यता की उम्मीद में उन्होंने दाखिला लिया ताकि उनकी नौकरी के अवसर बढ़ सकें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के जवाब भी कोर्ट में जमा किए हैं। इनमें साफ है कि यूनिवर्सिटी की मान्यता समाप्त हो चुकी थी। जो छात्र 2016 के बाद एडमिशन ले चुके हैं उन्हें इस मामले में गवाह बनाया गया है। फरीदाबाद स्थित इस यूनिवर्सिटी पर दो चार्जशीट दायर की गई हैं। पहली NAAC मान्यता के झूठे दावे की है और दूसरी यूजीसी एक्ट की धारा 12(बी) के तहत योग्यता छिपाने की।

यूनिवर्सिटी की जाँच नवंबर 2025 के दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट के बाद शुरू हुई थी। अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के तीन डॉक्टर उमर उन नबी, शाहीन अंसारी और मुजम्मिल गनाई जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंक मॉड्यूल में शामिल पाए गए। उमर उन नबी ने ही रेड फोर्ट में ब्लास्ट किया था जिसमें वह खुद मारा गया। मुजम्मिल गनाई को अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था जब उसके किराए के घर में 350 किलो विस्फोटक सामग्री मिली। बाद में शाहीन अंसारी को भी हिरासत में लिया गया।

यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी पर भी सख्त कार्रवाई हुई है। फरवरी 2026 में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उन्हें वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया। इससे पहले नवंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था। ईडी ने कोर्ट में बताया कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों को झूठे दावों से भर्ती करके 415 करोड़ रुपये का अपराधमूलक लाभ कमाया। जनवरी 2026 में ईडी ने यूनिवर्सिटी की 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियाँ जब्त कर लीं।

अब तक रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में पुलिस ने 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। 23 मार्च 2026 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के नौ स्थानों पर छापेमारी की। जाँच अभी जारी है और सभी आरोप अदालत में साबित होने बाकी हैं।