धोखाधड़ी-फेक डॉक्यूमेंट्स से अल-फलाह विश्वविद्यालय ने जुटाए ₹415 करोड़, परिवारवालों के खातों में किए ट्रांसफर: जवाद सिद्दीकी की मुश्किल बढ़ी, NAAC और UGC मान्यता के किए फर्जी दावे

अल-फलाह ट्रस्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर करोड़ों रुपये के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं, जिसके तहत ईडी और दिल्ली क्राइम ब्रांच जैसी एजेंसियों ने जाँच शुरू की है। विश्वविद्यालय के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी पर आरोप है कि उसने यूनिवर्सिटी के तहत फंडिंग के जरिए 415 करोड़ रुपए जुटाए। इस पैसे को परिवार से जुड़े संस्थानों और कंपनियों में भेजा गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय को विदेशी डोनेशन के नियमों का उल्लंघन करके अवैध फंडिंग मिली और काले धन को सफेद किया गया। इन आरोपों के बाद, ईडी ने ट्रस्ट से संबंधित कई स्थानों पर छापेमारी की है।

गौरतलब है कि ईडी ने लंबी जाँच और छापेमारी के बाद मंगलवार (18 नवंबर 2025) को जावेद को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उसे 13 दिन की कस्टडी में भेजा गया है। ED के प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 और 2024-25 के बीच अल फलाह ने धोखाधड़ी और फरिजी दस्तावेजों के जरिए 415.10 करोड़ रुपए जुटाए थे।

कोर्ट ने कहा कि जाँच अभी भी ‘प्रारंभिक चरण’ में है, लेकिन वित्तीय अपराध ‘गंभीर’ हैं। इस अपराध की आगे की कार्यवाही का पता लगाने, दागी संपत्तियों, गवाहों से पूछताछ और इससे जुड़े दस्तावेज या रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिहाज से जवाद को हिरासत में रखकर पूछताछ आवश्यक है।

अल-फलाह विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े कम से कम 19 जगहों की दिन भर चली तलाशी के बाद, सिद्दीकी पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया। इस तलाशी में समूह के प्रमुख लोगों के घर भी शामिल थे।

ईडी ने मंगलवार देर रात कहा, “यह गिरफ्तारी चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अल-फलाह समूह से संबंधित परिसरों पर की गई तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों की विस्तृत जाँच और विश्लेषण के बाद और अपराध में सिद्दीकी के शामिल होने की बात सिद्ध हुई है।”

छापेमारी के दौरान, एजेंसी ने 48 लाख रुपये से ज्यादा नकद, कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए। जाँचकर्ताओं ने कई फर्जी कंपनियों की पहचान की है और ट्रस्ट की ओर से की गई धोखाधड़ी का भी खुलासा किया।

ईडी ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो एफआईआर के बाद अपनी जाँच शुरू की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह विश्वविद्यालय ने छात्रों, अभिभावकों और अन्य स्टेकहोल्डर्स को गुमराह करने के लिए NAAC और UGC मान्यता के बारे में फर्जी दावे किए थे। एफआईआर में दावा किया गया था कि इसका मकसद गलत तरीके से आर्थिक लाभ कमाना और छात्रों को नुकसान पहुँचाना था।