इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि उत्तर प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों को किसी भी व्यापार के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ये जगहें सिर्फ शिक्षा देने के लिए हैं, न कि बिजनेस करने के लिए। कोर्ट ने पूरे राज्य में स्कूल-कॉलेज के अंदर किसी भी तरह के व्यापारिक आयोजन जैसे मेला, प्रदर्शनी, ट्रेड फेयर या सामान बेचने पर पूरी तरह बैन लगा दिया।
ये फैसला एक जनहित याचिका (PIL) पर आया। याचिका में हमीरपुर जिले के राठ में ब्रह्मानंद डिग्री कॉलेज के मैदान में इस साल एक व्यापारिक मेला लगाने को चुनौती दी गई थी। मामला चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने सुना।
कोर्ट ने साफ कहा कि स्कूल-कॉलेज की जमीन, इमारतें और खेल के मैदान सिर्फ पढ़ाई या उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए हैं। बेंच बोली, “शिक्षा संस्थान सिर्फ शिक्षा देने के लिए हैं। इनकी जमीन-इमारतों पर कोई व्यापारिक काम नहीं हो सकता, चाहे वो प्रदर्शनी हो, मेला हो या सामान बेचना हो।”
जजों ने कहा कि स्कूल-कॉलेज की सुविधाएँ सिर्फ पढ़ाई, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम या स्कूल खुद आयोजित करे, तभी इस्तेमाल की जा सकेंगी।
‘मेला खत्म हो गया’ वाला बहाना खारिज
याचिका इसलिए दायर हुई क्योंकि ब्रह्मानंद डिग्री कॉलेज में जनवरी से मार्च 2025 तक ‘स्वामी ब्रह्मानंद मेला महोत्सव’ नाम का व्यापारिक मेला लगा था। प्रिंसिपल की इजाजत से हुआ था, जो पहले के हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन था।
प्रिंसिपल ने कहा कि मेला मार्च 2025 में खत्म हो चुका है, इसलिए याचिका बेकार हो गई। लेकिन कोर्ट ने ये दलील ठुकरा दी। हाई कोर्ट ने कहा, “ये पूरे राज्य के शिक्षा संस्थानों से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।”
कोर्ट ने राठ के एसडीएम से पूछा कि मेला की इजाजत कैसे दी? एसडीएम ने कहा कि उसे हाई कोर्ट के पुराने आदेश की जानकारी नहीं थी।
पहले के आदेश हुए नजरअंदाज
हाई कोर्ट ने बताया कि 2020 में भी एक जज ने साफ कहा था कि स्कूल-कॉलेज की संपत्ति निजी या व्यापारिक काम के लिए नहीं दी जा सकती। वो आदेश चीफ सेक्रेटरी और शिक्षा सचिव को भेजा गया था। सभी डीएम को कहा गया था कि शादी-ब्याह या व्यापारिक आयोजन स्कूल में नहीं होंगे।
फिर भी कुछ जगहों पर बिना इजाजत या अफसरों की चिट्ठी से ऐसे आयोजन होते रहे।
बेंच ने कहा, “हमें कई याचिकाएँ मिल रही हैं। कहीं रिकॉर्ड में इजाजत नहीं, कहीं अफसर चिट्ठी लिख देते हैं।” जजों ने कहा कि कोई कानून स्कूल-कॉलेज की संपत्ति को व्यापार के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देता। सुनवाई में भी कोई ऐसा कानून नहीं बताया गया।
राज्य सरकार को दी सख्त हिदायत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक महीने में साफ-साफ सर्कुलर जारी करने को कहा। इसमें सभी डीएम, पुलिस और शिक्षा अफसरों को आदेश देना होगा कि शिक्षा संस्थानों में कोई व्यापारिक काम नहीं होगा।
कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक हफ्ते में ये आदेश चीफ सेक्रेटरी को भेजने को कहा गया।
ब्रह्मानंद कॉलेज के मैदान को फिर कभी व्यापारिक कामों के लिए इस्तेमाल न करने का आदेश दिया।
शिक्षण संस्थाओं का मतलब समझें
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि शिक्षा संस्थान पढ़ाई के लिए हैं, मुनाफे के लिए नहीं। मेला-प्रदर्शनी लगाने से शिक्षा का मकसद खराब होता है और बच्चों की पढ़ाई-खेल की जगह छिनती है।
अंत में हाई कोर्ट ने कहा, “शिक्षा संस्थानों की सुविधाएँ सिर्फ पढ़ाई और उससे जुड़े कामों के लिए हैं।” इससे हटकर कुछ करना जनता के हित और कानून की भावना के खिलाफ है।
अब यह फैसला उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए एक स्पष्ट निर्देश के रूप में काम करेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनके कैंपस अपने मूल उद्देश्य के लिए समर्पित रहें, यानी शिक्षा प्रदान करना।

