अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम कैंपबेल ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका के रणनीतिक हित पूरी तरह भारत के साथ जुड़े हैं ना कि पाकिस्तान के साथ। उन्होंने भारत-अमेरिका के रिश्तों की मौजूदा स्थिति पर चिंता भी जताई और कहा कि आगे इस साझेदारी की नींव आपसी सम्मान पर ही टिकी रहनी चाहिए।
अमेरिका का भविष्य भारत के साथ, पाकिस्तान कहीं आसपास भी नहीं
हडसन इंस्टीट्यूट में बोलते हुए कैंपबेल ने कहा, “हमें इस बारे में पूरी तरह से स्पष्टता चाहिए। अमेरिका का भविष्य भारत के साथ है और पाकिस्तान तो इसके आस-पास भी नहीं है। अगर मेरी इस बात से किसी को बुरा लगा हो तो मैं माफी चाहता हूँ।”
उन्होंने आगे कहा, “यह कुछ हद तक परेशान करने वाली बात है कि हमें आपसी सम्मान के बारे में याद दिलाना पड़ता है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अमेरिका-भारत संबंध कभी इस मोड़ पर पहुँचेंगे लेकिन मैं मानता हूँ कि हम आज इसी स्थिति में हैं और मेरा पक्का मानना है कि एक बुनियादी सिद्धांत के तौर पर यह बेहद जरूरी है।”
इस दौरान BJP नेता राम माधव ने भी भारत की रणनीतिक नीति का जिक्र करते हुए कहा, “जब भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता अपनाई थी तो हमारा मजाक उड़ाया गया था और हमें खारिज कर दिया गया था। लेकिन अब देखिए कि आज अमेरिका क्या कर रहा है। यह बिल्कुल रणनीतिक स्वायत्तता ही है। इसलिए आपसी सम्मान और संवेदनशीलता जरूरी हैं।”
क्वाड में भारत की अहम भूमिका, पर्दे के पीछे रहा नेतृत्व
कैंपबेल ने ‘क्वाड’ समूह में भारत की भूमिका को सबसे अहम बताते हुए कहा कि इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में भारत ही प्रमुख ताकत रहा है। उन्होंने कहा, “हमें यह मानना होगा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान प्रशासन के अहम लोगों ने यह फैसला किया था कि ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ (LAC) पर जब भारत के सामने सचमुच का खतरा था तब भारतीय दोस्तों को तुरंत जानकारी, इंटेलिजेंस और दूसरी चीजें मुहैया कराई जाएँ मैं वहाँ मौजूद था।”
उन्होंने आगे खुलासा करते हुए कहा, “मैंने चाहे जो भी रिपोर्टें देखी हों, राष्ट्रपति बाइडन ने एक घंटे से ज्यादा समय लगाकर, बहुत ज्यादा हिचकिचा रहे प्रधानमंत्री मोदी को ‘क्वाड’ में लीडर लेवल पर शामिल होने के लिए राजी कर लिया। सच कहूँ तो उन्होंने इस बात पर उनसे इतनी जोरदार बहस की कि आखिरकार मोदी को कहना पड़ा ‘मैं वादा करता हूँ कि मैं ऐसा करूँगा बस आप मुझ पर इतना जोर डालना बंद कर दीजिए।”
कैंपबेल ने जोर देकर कहा, “क्वाड के पीछे परदे के पीछे से अगुवाई करने वाला देश अमेरिका नहीं था। वह ऑस्ट्रेलिया भी नहीं था। वह जापान भी नहीं था। वह भारत था।”
भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया बदलावों का जिक्र करते हुए बताया गया कि अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के जवाब में भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के समीकरणों में बदलाव देखने को मिला। डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम का श्रेय लेने की कोशिश की जिसे भारत ने खारिज कर दिया जबकि पाकिस्तान ने इसे स्वीकार कर अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश की।

