जो नक्सलवाद का गढ़ था, वो जनजातीय कला-संस्कृति का केंद्र बना: ‘बस्तर पंडुम’ के समापन समारोह में बोले अमित शाह, कहा- स्कूल-अस्पताल जलाने वालों को नहीं छोड़ेंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। सोमवार (09 फरवरी 2026) को अमित शाह बस्तर में ‘बस्तर पंडुम’ के समापन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान अमित शाह ने बचे हुए नक्सलियों से पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर की पहचान बारूद से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति से है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का तेजी से सफाया हो रहा है और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को कोई आँच नहीं आएगी, लेकिन स्कूल और अस्पताल जलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दोहराया कि तय समय में नक्सलवाद खत्म होगा।

नक्सलियों से हथियार छोड़ने की अपील

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा, “हमारी लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ है जो विकास में बाधा हैं। जो लोग सड़कों में, खेतों में, पगडंडियों में आईईडी लगाते हैं वो जरा भी नहीं सोचते कि उनका ही आदिवासी भाई का पाँव उस पर पड़ेगा, वो हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएगा। उनको मालूम नहीं है कि कोई निर्दोष बच्ची बम से उड़ जाएगी। कहाँ से इतनी निर्दयता लेकर आए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं आज फिर से एक बार कहना चाहता हूँ। पहले भी कई बार मैं कह चुका हूँ। अभी भी जो बचे कुछे लोग हैं वो हथियार डाल दें। सरकार आपकी सभी प्रकार की चिंता करेगी। सम्मान के साथ आपका ध्यान रखा जाएगा। मैंने छत्तीसगढ़ के पुनर्वासन पैकेज को ध्यान से देखा है मैं मुख्यमंत्री जी और उपमुख्यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ कि इतना आकर्षक पुनर्वासन पैकेज कभी नहीं देखा।”

अगले 5 साल में बस्तर बनेगा विकसित संभाग

बस्तर के विकास पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, “आज हमारा बस्तर ब्रांड के रूप पूरे देश के सामने चमकता हुआ सामने आ रहा है। जो स्कूल 40-40 साल से बंद थे उन स्कूलों को छत्तीसगढ़ शासन ने खोलने का काम किया है। मैं हमारे आदिवासी भाइयों बहनों को पूछना चाहता हूँ। स्कूल जलाकर नक्सलियों ने किसका भला किया। हमारी नई पीढ़ी अक्षर ज्ञान से वंचित रह गई।”

लोगों से वादा करते हुए अमित शाह ने आगे कहा, “30 साल तक अपने गांव के स्कूल बंद करके निरक्षरों की फौज खड़ी कर दी गई। मगर मैं आज बस्तर वालों को कह कर जाता हूँ मेरा वादा है और साथ में संकल्प भी है देश के सभी जनजातीय संभागों में मेरा बस्तर पाँच साल में सबसे विकसित संभाग बन जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा, “हमने एक रोडमैप बनाया है। बस्तर के कई गाँव में बिजली नहीं थी हम 27 दिसंबर 2026 के पहले सभी गाँव में बिजली पहुँचाएँगे। हर गाँव में कनेक्टिविटी पहुँचाएँगे। हर 5 किलोमीटर में पोस्ट ऑफिस या तो बैंक का ब्रांच खोलेंगे। हर आदिवासी को पाँच किलो धान दिया जाएगा। घर में नल दिया जाएगा नल से जल आएगा।”