‘अजमेर दरगाह में खुदाई हुई तो महादेव ही निकलेंगे’: शिव मंदिर होने का दावा वाली याचिका कोर्ट ने स्वीकार की, ASI-राजस्थान सरकार को नोटिस

राजस्थान के अजमेर दरगाह को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आई है। सोमवार (19 जनवरी 2026) को अजमेर की सिविल कोर्ट ने महाराणा प्रताप सेना की उस अर्जी को स्वीकार कर लिया है, जिसमें दावा किया गया है कि दरगाह के अंदर दरअसल एक प्राचीन शिव मंदिर है।

कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान सरकार, आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट (ASI) और दरगाह कमेटी को भी पार्टी बनाया और नोटिस जारी कर दिया है। अब इस पूरे विवाद पर अगली सुनवाई 21 फरवरी 2026 को होगी।

क्या है पूरा विवाद और मंदिर का दावा?

महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार का कहना है कि जिसे आज दुनिया अजमेर दरगाह के नाम से जानती है, वह असल में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की नगरी ‘अजयमेरु’ का हिस्सा है।

सेना के अध्यक्ष का दावा है कि दरगाह के नीचे भगवान शिव का प्राचीन मंदिर आज भी बंद हालत में मौजूद है। उनके वकील एपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि उनके पास रेवेन्यू विभाग के पुराने नक्शे और शिवलिंग की पुरानी तस्वीरें भी हैं, जो साबित करती हैं कि यहाँ सदियों पहले पूजा-अर्चना होती थी।

7800 किलोमीटर की यात्रा और लाखों लोगों का साथ

यह मामला सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। राजवर्धन सिंह ने इसके लिए राजस्थान में करीब 7800 किलोमीटर की पैदल यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने सवा लाख से ज्यादा लोगों के साइन (हस्ताक्षर) लिए और हलफनामे तैयार किए, जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया है। उनका कहना है कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सवाल है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वहाँ खुदाई हुई तो महादेव ही निकलेंगे।

राजवर्धन सिंह बने ‘नंबर वन’ याचिकाकर्ता

खास बात यह है कि दरगाह को लेकर पहले भी एक याचिका लगी थी, लेकिन कोर्ट ने राजवर्धन सिंह को इस केस में ‘मुख्य पक्षकार’ माना है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने 2022 में ही राष्ट्रपति को इस बारे में अर्जी भेज दी थी। कोर्ट ने माना कि इस मुद्दे पर सबसे पहले पहल उन्होंने ही की थी। अब दरगाह कमेटी और सरकार को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा।