‘जिसे तोड़ा गया वो भगवान विष्णु की प्रतिमा थी, सिर्फ 8 हाथ वाली मूर्ति नहीं’: थाईलैंड सेना पर भड़का उनका अपना मीडिया, Bangkok Post ने पत्रकारों को भी लताड़ा

थाईलैंड के प्रतिष्ठित अखबार बैंकॉक पोस्ट ने अपने संपादकीय ने सोमवार (22 दिसंबर 2025) को कंबोडिया के प्रीह विहार क्षेत्र के पास विवादित सीमा इलाके में भगवान विष्णु की प्रतिमा को ढहाए जाने को लेकर थाई सेना की कड़ी आलोचना की है। संपादकीय में इस कार्रवाई को ‘सांस्कृतिक संवेदनशीलता से रहित शक्ति प्रदर्शन’ बताया गया है और कहा गया है कि सीमा विवाद के बावजूद धार्मिक और सांस्कृतिक आस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए था। बैंकॉक पोस्ट ने इस घटना पर थाई पत्रकारों की प्रतिक्रिया को भी आड़े हाथों लिया है।

संपादकीय में क्या लिखा है?

‘Power with no sensitivity’ शीर्षक वाले इस संपादकीय में कहा गया है कि एक हिंदू देवता की प्रतिमा को बुलडोजर से गिराने का संदेश स्पष्ट रूप से अपमानजनक और नुकसानदेह था। इसमें यह भी रेखांकित किया गया कि तथाकथित ‘सीमा प्रबंधन’ को जिस तरह थाई मीडिया ने एक तमाशे की तरह पेश किया, वह पूरी तरह अनुचित था।

संपादकीय में एक थाई टीवी एंकर का उदाहरण दिया गया, जिसने भगवान विष्णु की प्रतिमा को केवल ‘आठ हाथों वाली मूर्ति’ कहकर संबोधित किया, नाम तक लेने की जरूरत नहीं समझी और यह कहकर उपहास किया कि आठ हाथ होने के बावजूद वह ‘खुद को नहीं बचा सकी।’

संपादकीय ने याद दिलाया कि भारत सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में सही कहा है कि हिंदू और बौद्ध परंपराएँ एक साझा सभ्यतागत विरासत से जुड़ी हैं। ऐसे में सेना और मीडिया द्वारा दिखाई गई यह असंवेदनशीलता और उपहास थाईलैंड की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाता है।

लेख में यह भी कहा गया कि हिंदू ब्रह्मांडीय विचारधारा ने थाई संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है। केवल बौद्ध प्रतीकों के प्रति सम्मान दिखाते हुए हिंदू आस्था का मजाक उड़ाना, लोगों की अपनी ही सांस्कृतिक जड़ों और साझा इतिहास के प्रति अज्ञानता को दर्शाता है। मीडिया के इस रवैये को संपादकीय ने ‘एक संकीर्ण, आत्मकेंद्रित दृष्टिकोण’ बताया, जो केवल अपने प्रतीकों को ही पवित्र मानता है।

आस्था का अपमान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संपादकीय में यह तर्क भी खारिज किया गया कि चूँकि यह प्रतिमा प्राचीन नहीं थी और 2014 में स्थापित की गई थी, इसलिए उसका कोई विशेष महत्व नहीं था। लेख में साफ कहा गया, “आस्था की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।” इसमें यह भी जोड़ा गया कि जिस तरह दुनिया के किसी भी हिस्से में बौद्ध प्रतीकों को नुकसान पहुँचने पर बौद्ध संस्थाएँ आवाज उठाती हैं, उसी तरह इस घटना की निंदा और विरोध के लिए उन्हें एकजुट होना चाहिए था।

यह घटना वीडियो में कैद हुई और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुई, जिसमें थाई सैन्य इंजीनियर भारी मशीनरी से हिंदू देवता की लगभग नौ मीटर ऊँची प्रतिमा को गिराते हुए दिखे। यह प्रतिमा कंबोडिया के प्रीह विहार प्रांत के अन सेस क्षेत्र में, थाई सीमा के पास स्थित थी। कंबोडियाई अधिकारियों का कहना है कि यह संरचना पूरी तरह उनके क्षेत्र के भीतर थी।

बुधवार (24 दिसंबर 2025) को भारत के विदेश मंत्रालय ने इस तोड़फोड़ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे अपमानजनक बताया और कहा कि इससे दुनियाभर के श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि हिंदू और बौद्ध देवता इस क्षेत्र की साझा सभ्यतागत विरासत का हिस्सा हैं और किसी भी तरह के क्षेत्रीय विवाद के बावजूद ऐसी घटनाएँ नहीं होनी चाहिए।