ना इलाज दिया, टॉर्चर किया सो अलग: बांग्लादेश में 83 साल के हिंदू नेता की जेल में मौत, लोगों ने कहा- ये हत्या है

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव के बीच हिंदुओं पर हमले और उनकी टार्गेट किलिंग की खबरें लगातार सामने आ रही है। शनिवार (7 फरवरी 2026) को बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई। हिंदू नेता की इस मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

83 वर्षीय सेन की मौत को लेकर विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने हिरासत में लापरवाही, राजनीतिक उत्पीड़न और टारगेटेड कार्रवाई के गंभीर आरोप लगाए हैं। खास तौर पर हिंदू नेताओं की टारगेट किलिंग और जेल में हो रही मौतों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जेल में कैसे हुई रमेश चंद्र सेन की मौत?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (7 फरवरी 2026) की सुबह करीब 9 बजे रमेश चंद्र सेन की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिनाजपुर जिला जेल से दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहाँ इमरजेंसी विभाग के डॉक्टरों ने सुबह 9:29 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जेल प्रशासन का कहना है कि सेन लंबे समय से बीमार थे और तबीयत बिगड़ते ही उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया लेकिन विपक्षी दल और अवामी लीग इसे महज औपचारिक बयान मान रहे हैं। जेल सुपरिटेंडेंट फरहाद सरकार ने कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

रमेश चंद्र सेन को 16 अगस्त 2024 को ठाकुरगाँव से गिरफ्तार किया गया था और बाद में दिनाजपुर जिला जेल में शिफ्ट किया गया। उन पर तीन अलग-अलग मुकदमे चल रहे थे, जिनमें एक हत्या से जुड़ा मामला भी शामिल था।

बढ़ती हिरासत में मौतें और यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप

रमेश चंद्र सेन की मौत ऐसे समय पर हुई है, जब बांग्लादेश की जेलों में अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत में मौतों का आँकड़ा तेजी से बढ़ा है। अगस्त 2024 से अब तक अवामी लीग और उसके सहयोगी संगठनों, छात्र लीग और जुबो लीग के कम से कम 30 से 40 वरिष्ठ नेता और सक्रिय कार्यकर्ता जेल या पुलिस हिरासत में जान गँवा चुके हैं।

मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (ASK) के हवाले से बताया गया है कि सिर्फ 2025 में ही हिरासत में 107 कैदियों की मौत हुई, जिनमें बड़ी संख्या अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों की थी। लगभग हर मामले में प्रशासन ने मौत का कारण दिल का दौरा या अचानक बीमारी बताया। विपक्ष का आरोप है कि इन मामलों की निष्पक्ष जाँच तक नहीं कराई गई।

आवामी लीग ने इस मामले में मोहम्मद युनूस के नेतृत्व में चल रही अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आवामी लीग ने X पर लिखा, “राज्य राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए जेलों को एक खामोश हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। जेल अधिकारियों ने इसे ‘स्वाभाविक मौत’ बताया है लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है। उन्हें कोई बेहतर मेडिकल सुविधा नहीं दी गई। “

आवामी लीग ने कहा, “गिरफ्तारी के बाद हिरासत में टॉर्चर, सही मेडिकल इलाज न मिलना, अचानक सेहत खराब होना और कुछ ही मिनटों में मौत की घोषणा, ये सब मिलकर एक परेशान करने वाला सवाल उठाते हैं। क्या यह सच में एक हादसा था या राजनीतिक बदले की लगातार चल रही कहानी का एक और अध्याय? यह एक संदेश है: अब जेलों के अंदर कोई न्याय नहीं है, सिर्फ मौत इंतजार कर रही है।”

बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने भी आरोप लगाया कि सेन को जानबूझकर जमानत और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा गया और यह सब राजनीतिक प्रतिशोध के तहत किया गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर सेन की संदिग्ध मौत को हत्या से जोड़कर देखा है। लोग इसे हत्या बता रहे हैं और युनूस नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं।