बांग्लादेश में तारिक रहमान सरकार में भी हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार थम नहीं रहा है। ताजा मामला राजधानी ढाका से सामने आया है, जहाँ लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र और पुजारी का अपहरण कर लिया गया। बदमाशों ने उसे बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, कपड़े उतरवा दिए और फिर परिवार से 50 हजार टका की फिरौती की माँग की। किसी तरह छात्र उनकी कैद से भागने में सफल रहा लेकिन इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया। फिलहाल ढाका मेडिकल कॉलेज में उसका इलाज चल रहा है।
द डेली स्टार के मुताबिक, पीड़ित की पहचान 27 साल के सुभाष देउरी के रूप में हुई है। वह ओल्ड ढाका के सेंट्रल लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है। पढ़ाई के साथ-साथ वह जगन्नाथ यूनिवर्सिटी के मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान में भी सहयोग करता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (29 जून 2026) की रात करीब 8 बजे सुभाष रिक्शे से स्वामीबाग इलाके पहुँचा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उसका अपहरण कर लिया। आऱोपितों ने सुभाष को वारी क्षेत्र के एक मकान में बंधक बनाकर रखा। वहाँ सुभाष के साथ मारपीट की गई और लगातार शारीरिक व मानसिक यातनाएँ दी गईं।
पीड़ित के परिजनों का कहना है कि बदमाशों ने पहले सुभाष की बेरहमी से पिटाई की। इसके बाद उन्हें परिवार और दोस्तों को फोन कर पैसे मँगाने के लिए मजबूर किया गया। आरोपितों ने रिहाई के बदले 50 हजार टका की फिरौती माँगी। परिवार ने किसी तरह 20 हजार टका की व्यवस्था कर आरोपितों को दे दिए जबकि बाकी रकम अगले दिन देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद सुभाष को प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोपितों ने सुभाष के कपड़े भी उतरवा दिए और उन्हें लगातार डराते-धमकाते रहे।
मंगलवार (30 जून 2026) सुबह सुभाष ने मौका देखकर वहाँ से भागने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, जान बचाने के लिए उन्होंने इमारत के एक हिस्से से नीचे छलाँग लगा दी। छलाँग लगाने से सुभाष के पैर और कूल्हे की हड्डी टूट गई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह किसी तरह अपने रूममेट तक पहुँचे। इसके बाद उन्हें तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी सर्जरी करनी पड़ सकती है।
सुभाष ने पुलिस को बताया कि उन्हें स्वामीबाग इलाके के एक घर में बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपितों की तलाश की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अपहरण के पीछे केवल फिरौती का मकसद था या इसके पीछे कोई और वजह भी थी।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल के महीनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, हत्या, लूटपाट और उत्पीड़न की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस नई घटना के बाद एक बार फिर बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

