बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना ने 12 फरवरी 2026 को हुए संसदीय चुनावों और संवैधानिक जनमत संग्रह को सिरे से खारिज कर दिया है। हसीना ने एक कड़ा बयान जारी कर इसे ‘बोगस’, ‘तमाशा’ और वोटों की ‘इंडस्ट्रियल लेवल’ पर की गई धांधली करार दिया है। शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर चुनाव में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया है।
आँकड़ों का खेल: ‘एक घंटे में पड़े 2 करोड़ से ज्यादा वोट’
शेख हसीना ने चुनाव आयोग के आँकड़ों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सुबह 11 बजे तक सिर्फ 14.96% मतदान हुआ था, लेकिन दोपहर 12 बजे तक यह अचानक उछलकर 32.88% हो गया।
शेख हसीना के मुताबिक, इसका मतलब यह हुआ कि सिर्फ एक घंटे में 2,28,80,350 वोट डाले गए, यानी हर मिनट लगभग 3.81 लाख वोट। हसीना ने तर्क दिया कि जब मतदान केंद्र खाली थे, तो इतने कम समय में इतने वोट पड़ना नामुमकिन और हास्यास्पद है।
जनमत संग्रह और ‘जुलाई चार्टर’ पर सवाल
पूर्व पीएम ने संवैधानिक सुधारों (जुलाई चार्टर) के लिए हुए जनमत संग्रह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर पर ‘हाँ’ के बगल में टिक मार्क (✓) और ‘नहीं’ के बगल में क्रॉस (X) का निशान लगाकर लोगों की मानसिकता को प्रभावित करने की कोशिश की गई। साथ ही, जनमत संग्रह के नतीजों में 5 घंटे की देरी को भी उन्होंने धांधली का हिस्सा बताया।
हिंसा और धांधली के गंभीर आरोप
हसीना ने दावा किया कि उनकी पार्टी अवामी लीग ने चुनाव का बहिष्कार नहीं किया था, बल्कि उन्हें जानबूझकर चुनाव से बाहर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान बूथों पर कब्जा किया गया, पहले से ही मुहर लगे बैलेट पेपर इस्तेमाल हुए और वोटरों को डराया गया। उन्होंने बीएनपी (BNP) पर तंज कसते हुए कहा कि अतीत में उन्होंने हिंसा फैलाई थी, जबकि अवामी लीग ने लोगों से शांतिपूर्ण बहिष्कार की अपील की थी।
शेख हसीना की प्रमुख माँगें
अपने बयान के अंत में शेख हसीना ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई बड़ी माँगें रखी हैं। उन्होंने इस पूरे चुनाव को ‘वोटर रहित और असंवैधानिक’ बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की माँग की है। साथ ही, उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को ‘हत्यारा-फासीवादी’ बताते हुए उनके इस्तीफे पर जोर दिया है।
हसीना ने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक कैदियों, जिनमें शिक्षक, पत्रकार और बुद्धिजीवी शामिल हैं, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगे सभी झूठे केस वापस लिए जाएँ। वह चाहती हैं कि अवामी लीग पर लगी पाबंदियाँ हटाई जाएँ और एक निष्पक्ष ‘केयरटेकर’ सरकार की देखरेख में दोबारा चुनाव कराए जाएँ ताकि जनता को उनके सही वोटिंग अधिकार मिल सकें।
गौरतलब है कि इन विवादों के बीच चुनाव आयोग ने लगभग 60% मतदान दर्ज किया है, जिसमें तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) ने ऐतिहासिक और भारी बहुमत से जीत हासिल की है, जिससे उनका प्रधानमंत्री बनना तय हो गया है।

