शेख हसीना को फाँसी की सजा: बांग्लादेश की ICT ने मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी माना, पूर्व मंत्री हसनुल हक के साथ बातचीत को भी किया साझा

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल यानी ICT ने मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी माना है और उन्हें फाँसी की सजा सुनाई है।

जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अगुवाई वाली 3 जजों की खंडपीठ ने अपना फैसला 6 हिस्सों में सुनाया। खंडपीठ ने शेख हसीना को उन्हें फाँसी देने तक जेल में रखने का फैसला भी दिया है।

इस खंडपीठ में जस्टिस मोहम्मद मोहितुल एनाम चौधरी और जस्टिसमोहम्मद शफीउल आलम महमूद हैं। खंडपीठ ने कहा कि उन्होंने क्रूरता किया क्योंकि बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराए गए।

ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और तत्कालीन मंत्री हसनुल हक इनु के बीच हुई बातचीत को भी साझा किया और कहा कि इससे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुई हिंसक कार्रवाई में हसीना की भूमिका का पता चलता है। कोर्ट ने कहा कि हसीना ने छात्रों के प्रदर्शन को आतंकी गतिविधियों के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि सुरक्षाबलों की ओर से की गई कार्रवाई की वजह से ज्यादातर मौतें हुई। शेख हसीना की सरकार ने सेना, पुलिस और आरएबी ने न्याय प्रक्रिया से हटकर हत्याएँ की।

इस मामले में ट्रिब्यूनल ने पूर्व गृह मंत्री ए खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून भी आरोपी हैं। ट्रिब्यूनल ने तीनों को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के सीधे आदेश की वजह से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ और नागरिकों की मौत हुई।

ट्रिब्यूनल ने तीन अपराधों को गिनाया है, जिसकी वजह से शेख हसीना समेत 3 लोगों को मौत की सजा दी गई। पहला, निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने का आदेश देना। दूसरा, ढाका के आसपास छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई में कई छात्रों की मौत हुई और तीसरा भड़काऊ भाषण देकर जनता को उकसाया गया।