बांग्लादेश में दीपू दास को आग लगाने के लिए जिसने इकट्ठा की थी कट्टरपंथी भीड़, वो यासीन अराफात 20 दिन बाद जाकर हुआ गिरफ्तार

बांग्लादेश पुलिस ने मयमनसिंह जिले में हुई हिंदू युवक दीपू दास की हत्या मामले में मुख्य आरोपित यासीन आराफात को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आराफात ने इस हत्या की साजिश रची और भीड़ को हिंसक कार्रवाई के लिए उकसाने में अहम भूमिका निभाई।

नौकरी से निकाला और मौत के मुँह में धकेला

यह दर्दनाक घटना 18 दिसंबर 2025 की है, जब 27 वर्षीय दीपू दास पर ईशनिंदा का कथित आरोप लगाया गया। इसके बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने पहले उसे जबरन नौकरी से इस्तीफा देने पर मजबूर किया और फिर उसे सुरक्षा देने के बजाय बाहर खड़ी उग्र इस्लामी भीड़ के हवाले कर दिया। आरोप है कि दीपू के साथ काम करने वाले कुछ सहकर्मी भी उस हिंसक भीड़ का हिस्सा बन गए थे, जो उसकी जान लेने पर उतारू थी।

पेड़ से लटकाया और जिंदा जलाया

जाँच में यासीन आराफात की बेहद क्रूर भूमिका सामने आई है। वह स्थानीय मस्जिद में तालीम देता था और पूर्व शिक्षक रह चुका है। यासीन आराफात ने ही भीड़ को इकट्ठा किया और दीपू दास पर हमला करवाया।

उग्र भीड़ ने दीपू को बेरहमी से पीटा, उसे घसीटकर एक चौराहे पर ले गए और पेड़ से लटका दिया। हैवानियत यहीं नहीं रुकी, बाद में उसके शव को आग के हवाले कर दिया गया। घटना के बाद से ही आराफात फरार था और पुलिस से बचने के लिए छिप रहा था।

जाँच के घेरे में गहरा नेटवर्क

पुलिस अब यासीन आराफात के प्रभाव और उसके कट्टरपंथी नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साजिश में और कौन से बाहरी तत्व शामिल थे। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 21 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य दोषियों की तलाश में छापेमारी जारी है।