बांग्लादेश में ‘ईशनिंदा’ बनती हिंदुओं के खिलाफ हथियार, 6 महीने में 71 केस: दीपू दास को पीट-पीटकर मारा, HRCBM की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आँकड़े

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ ‘ईशनिंदा’ के आरोपों को हथियार बनाकर की जा रही हिंसा ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। मानवाधिकार संगठन HRCBM की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 से दिसंबर 2025 के बीच हिंदुओं के खिलाफ ईशनिंदा के 71 मामले दर्ज किए गए हैं।

सबसे दिल दहला देने वाली घटना 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में हुई, जहाँ 30 साल के दीपू चंद्र दास की भीड़ ने न केवल पीट-पीटकर हत्या कर दी, बल्कि उनके शव को आग के हवाले भी कर दिया।

रिपोर्ट बताती है कि यह हिंसा किसी एक जगह नहीं, बल्कि रंगपुर, चटगाँव और खुलना समेत 30 से अधिक जिलों में फैली हुई है। हमले का तरीका एक जैसा है। पहले सोशल मीडिया पर फर्जी या हैक्ड आईडी से पोस्ट का आरोप लगाया जाता है, फिर भीड़ जुटाई जाती है और घरों में तोड़फोड़ की जाती है। रंगपुर में एक 17 साल के लड़के पर आरोप लगा, लेकिन सजा पूरे मोहल्ले को मिली और 22 हिंदू घरों को तबाह कर दिया गया।

ईशनिंदा के इन आरोपों ने छात्रों का भविष्य भी दाँव पर लगा दिया है। बिना किसी फॉरेंसिक जाँच के हिंदू छात्रों को यूनिवर्सिटी और स्कूलों से निकाला जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि 90% आरोपित हिंदू हैं, जिनमें 15 से 17 साल के बच्चे भी शामिल हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों को डराने और उन्हें समाज से बाहर निकालने की एक सुनियोजित साजिश है।