बांग्लादेश सरकार की मदद राहत नहीं, अपमान जैसी: यूनुस पर भड़के दीपू दास के परिजन, चावल-कंबल-सिलाई मशीन और 1.25 लाख टका दिए

बांग्लादेश में 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह शहर में हिंदू युवक दीपू दास की इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद पीड़ित परिवार प्रशासन की भूमिका और मुआवजे पर सवाल उठा रहा है। परिवार का कहना है कि यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा दी गई आर्थिक सहायता उनके लिए राहत नहीं बल्कि अपमान जैसी है। पीड़िता परिवार ने कहा कि पैसों से न तो उनके बेटे की जान लौट सकती है और न ही परिवार के टूटे सहारे की भरपाई हो सकती है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, दीपू दास के पिता भक्त रविदास ने बताया कि उनके बेटे को नौकरी लॉटरी के जरिए मिली थी और वह प्रमोशन की तैयारी में था। इसी नौकरी को लेकर कुछ लोगों ने उस पर दबाव बनाया और कई बार धमकी दी कि अगर वह उन्हें नौकरी नहीं दिलाएगा तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

परिजनों के अनुसार, जब दीपू ने ऐसा करने से इनकार किया तो उसके खिलाफ ईशनिंदा की अफवाह फैलाई गई। 18 दिसंबर को कारखाने में काम के दौरान दीपू पर भीड़ ने हमला किया, पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी और बाद में शव को सार्वजनिक रूप से लटका कर जला दिया।

हालाँकि, बाद में प्रशासन ने साफ किया कि ईशनिंदा के आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला। घटना के बाद प्रशासन ने पहले 25000 टका, चावल, कंबल और सिलाई मशीन दी, फिर 1 लाख टका का चेक सौंपा। परिवार का कहना है कि यह मदद उनके दर्द के मुकाबले बेहद कम है।