पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बीच कई जगहों पर झड़पों की खबर आई है। आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज के काउंटिंग सेंटर पर विवाद के बीच टीएमसी के गुंडों ने बवाल किया जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। यहाँ वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया। इसी तरह बैरकपुर में भी बवाल किया गया।
TMC वाले काउंटिंग में हारने के बाद हंगामा करने की
— Baliyan (@Baliyan_x) May 4, 2026
कोशिश कर रहे थे-
सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज के द्वारा सारी गुंडई निकाल दी है 👏👏
भाजपा जीती है तब भी उसकी तरफ़ से कोई अराजकता या दंगे नहीं होने है।
TMC जीतती तो सैकड़ो लोग जान गँवाते – बस इसीलिए भी बंगाल ने TMC को खाड़ी में… pic.twitter.com/OzeIf2fYR2
बंगाल में चुनाव बाद भी खून खराबे का इतिहास रहा है। इसको देखते हुए सीआरपीएफ ने न सिर्फ चुनाव के दौरान शांति बनाए रखने के लिए चप्पे चप्पे पर तैनात रही, बल्कि करीब 500 सीएपीएफ की कंपनियाँ राज्य की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अगले आदेश तक मौजूद रहेगी।
सीएपीएफ में सीआरपीएफ की 200 कंपनियाँ, बीएसएफ की 150 कंपनियाँ, सीआईएसएफ की 50 कंपनियाँ, आईटीबीपी की 50 कंपनियाँ और एसएसबी की 50 कंपनियाँ शामिल हैं। सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह ने इसकी जानकारी पहले ही दे दी थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव नतीजों के दिन वह व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहेंगे।
Ensuring a peaceful and secure democratic process! 🗳️
— 🇮🇳CRPF🇮🇳 (@crpfindia) May 4, 2026
The DGs of all CAPFs are currently stationed in Kolkata, maintaining a vigilant watch over the counting process security and the law & order situation in West Bengal.
By operating from a Centralised Election Control Room,… pic.twitter.com/4jrR6TbHWq
इससे पहले ITBP, CRPF, BSF, CISF और SSB के DGs के साथ-साथ DGP पश्चिम बंगाल और स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर ने CAPF फील्ड कमांडरों और कर्मचारियों के साथ वार्ता की। काउंटिंग और चुनाव के बाद कानून-व्यवस्था के इंतजामों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।
As mentioned earlier, 500 companies of CAPF would stay in West Bengal, after the polling, till further orders.
— GP Singh (@gpsinghips) April 29, 2026
Relevant extracted portion of the order of March 19th 2026 is attached. https://t.co/yiiAv5ryny pic.twitter.com/vdKMGxXzRK
दरअसल बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 इस मामले में ऐतिहासिक माना जा सकता है, क्योंकि इस चुनाव में एक भी चुनाव में मौत की खबर नहीं आई। हालाँकि मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना जैसे क्षेत्रों में झड़पें हुई, लेकिन पहले की तुलना में काफी कम थी।
इससे पहले बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में भारी हिंसा हुई थी और 58 लोगों की मौत हुई थी। विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए और आगजनी हुई थी। इसी तरह पंचायत चुनाव 2023 में भी करीब 50 लोगों की मौत हुई थी।
चुनाव आयोग ने इस बार केन्द्रीय बलों को मुस्तैद कर शांतिपूर्ण चुनाव करा कर एक इतिहास रच दिया है। अब नतीजों के बाद किसी तरह का खून खराबा न हो, इसकी तैयारी भी कर ली गई है।

