भोपाल में हिंसा के लिए इस्लामी भीड़ ने किया हिंदू संगठन को बदनाम, पुलिस ने बताया- मुस्लिम युवक को पीटने वाले का बजरंग दल से लेना-देना ही नहीं

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘लव जिहाद’ मामले में मुस्लिम युवक की पिटाई के आरोपितों को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने बताया है कि आरोपितों में से कोई भी बजरंग दल या किसी अन्य दक्षिणपंथी हिंदू संगठन से नहीं जुड़ा है। इस मामले में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बजरंग दल का नाम लेते हुए जमकर हिंसा की थी और खुलेआम ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाते हुए पत्थरबाजी की थी।

पुलिस के मुताबिक, एक होटल में हिंदू महिला के साथ पकड़े गए मुस्लिम युवक की पिटाई करने के आरोप में जिन सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से एक भी व्यक्ति बजरंग दल या किसी अन्य ‘दक्षिणपंथी हिंदू संगठन’ से नहीं जुड़ा है।

गोविंदपुरा थाना प्रभारी (SHO) अवधेश सिंह तोमर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “दक्षिणपंथी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सूचित किया है कि वे एक अनुशासित संगठन हैं और ये व्यक्ति उनके सदस्य नहीं हैं।”

पुलिस ने इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपित बनाया है, जिनमें से एक नाबालिग (Juvenile) है। बाकी छह आरोपितों की पहचान बृजेंद्र प्रजापति, प्रतीक चौकसे, लालाराम मीणा, रमेश, अजय और अमन के रूप में हुई है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस मुस्तैदी से जाँच में जुटी है। भोपाल जोन 1 के पुलिस उपायुक्त (DCP) आयुष गुप्ता ने बताया कि इस घटना के संबंध में पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा, “हम फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रहे हैं। उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज का विश्लेषण भी किया जा रहा है। इसके साथ ही हम शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के काजी और समुदाय के अन्य नेताओं के साथ भी लगातार बातचीत कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि हिंदू कार्यकर्ताओं द्वारा मुस्लिम युवक की पिटाई की खबर फैलने के बाद 12 मई 2026 को भोपाल की सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय की भीड़ विरोध प्रदर्शन करने के लिए उतर आई थी। इस दौरान भीड़ काफी उग्र हो गई और उसने ‘सर तन से जुदा’ तथा ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाते हुए जमकर पथराव किया।

इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने सड़कों पर खड़े आम नागरिकों के वाहनों और पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की। स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इसके तुरंत बाद प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीर गेट, शाहजहाँबाद और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में बीएनएसएस की धारा 163 (जो पहले सीआरपीसी की धारा 144 थी) लागू कर दी। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 9 मई को शुरू हुआ था, जब कुछ कार्यकर्ताओं को इनपुट मिला था कि गौतम नगर इलाके के ‘प्राइड होटल’ में एक मुस्लिम युवक और एक हिंदू महिला ठहरे हुए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बजरंग दल के सदस्य होटल पहुँचे और उस कमरे में दाखिल हुए जहाँ यह जोड़ा रुका था। उन्होंने आरिफ खान नाम के मुस्लिम युवक को कमरे से बाहर घसीटा, उसे अधनंगा किया। उन्होंने उसके चेहरे पर स्याही व गाय का गोबर मलकर उसे सड़क पर घुमाया।

आरिफ को पुलिस ने दोबारा किया गिरफ्तार

इस मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने मुस्लिम युवक आरिफ खान को दोबारा गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरिफ हाल ही में जेल से रिहा हुआ था, लेकिन जाँच के दौरान यह बात सामने आई कि वह पहले भी मोबाइल फोन चोरी के दो मामलों में शामिल रहा है। इसी आपराधिक बैकग्राउंड के चलते पुलिस ने उसे फिर से हिरासत में ले लिया है।