सीतामढ़ी में 7400 मरीज नहीं है HIV संक्रामक: फर्जी खबर फैलने पर बिहार के स्वास्थ विभाग ने खंडन किया, दिया 20 साल का आँकड़ा

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सीतामढ़ी जिले में HIV मरीजों की संख्या को लेकर मीडिया में चली खबरों को गलत और भ्रामक बताते हुए आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। कई चैनलों और अखबारों ने दावा किया था कि जिले में HIV संक्रमित मरीजों का आँकड़ा तेजी से बढ़कर 7000 से ज्यादा हो गया है। विभाग का कहना है कि यह संख्या अचानक बढ़े मामलों की नहीं, बल्कि पिछले 20 सालों के कुल रजिस्टर्ड मरीजों की है, जिसे गलत तरीके से ‘तेजी से बढ़ रहे मामले’ बताकर प्रस्तुत किया गया।

पुरानी खबरों में क्या छपा था?

हाल ही में कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सीतामढ़ी जिले में HIV के 7400 से अधिक मरीज दर्ज हैं, जिनमें लगभग 400 बच्चे शामिल हैं और हर महीने 40–60 नए मरीज सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि ART सेंटर हाईलोड होकर पूरी तरह दबाव में है और जिले में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इन खबरों ने लोगों में डर और भ्रम पैदा कर दिया।

स्वास्थ्य विभाग ने क्यों जारी किया पत्र?

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि ICTC केंद्र 2005 में और ART इलाज 2012 में शुरू हुआ था। इन 20 वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 6900 मरीज रजिस्टर्ड हुए हैं, जिनमें से कई की मृत्यु हो चुकी है या वे अन्य जिलों में इलाज के लिए स्थानांतरित किए गए।

वर्तमान में करीब 4958 मरीज ART केंद्र से नियमित दवाएँ ले रहे हैं। विभाग ने मीडिया में चल रही इस बात का खंडन किया कि रोज नई बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। वास्तविकता यह है कि पुराने रजिस्टर्ड मरीज ही रोज दवा और परामर्श के लिए अस्पताल पहुँचते हैं, जिसे गलत तरीके से ‘नए मामले’ बताया गया।

बच्चों के बारे में गलत दावे

विभाग ने कहा कि संक्रमित बच्चों की संख्या 400 नहीं, बल्कि अब तक की कुल संख्या सिर्फ 188 है। ये सभी बच्चे उन्हीं परिवारों से आते हैं, जहाँ माता-पिता पहले से HIV संक्रमित हैं। इन बच्चों का इलाज और आर्थिक सहायता दोनों जारी है।

इसके अलावा, बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने अपील की है कि HIV संक्रमित लोगों से भेदभाव न किया जाए, अधिक से अधिक लोग HIV टेस्ट कराएँ और यह समझें कि यह संक्रमण सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। जागरूकता, संवेदनशीलता और सहयोग ही इस समस्या का वास्तविक समाधान है।