Special Intensive Revision of Electoral Rolls in #Bihar Successfully Completed#ECI thanks all the Electors of Bihar for making this exercise a Grand Success
— Election Commission of India (@ECISVEEP) September 30, 2025
Final Electoral Roll published today; includes nearly 7.42 crore electors
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1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया गया था। इस प्रारूप और मंगलवार को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची की तुलना करने पर ये पता चलता है कि मतदाताओं की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है। अंतिम सूची में 7.42 करोड़ मतदाताओं के नाम हैं, जो SIR प्रक्रिया से पहले 7.89 करोड़ नामों से 47 लाख कम हैं।
सबसे ज्यादा नेपाल की सीमा से लगे सीमांचल जिलों में मतदाताओं की संख्या में कमी देखी गई। इनमें मुस्लिम बहुल जिले भी शामिल हैं। इसके विपरीत, बिहार के सबसे अधिक आबादी वाले जिले पटना में मतदाताओं की संख्या में सबसे कम 4.59% की गिरावट देखी गई। वहीं मगध में सबसे ज्यादा मतदाता जोड़े गए।
गोपालगंज में एसआईआर शुरू होने से पहले, 24 जून 2025 को 20.56 लाख मतदाता थे। 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट सूची में ये 15.1% घटकर 17.46 लाख रह गए। अंतिम मतदाता सूची में अब 3.49% बढ़कर 18.07 लाख हो गए हैं। कुल मिलाकर, एसआईआर के दौरान गोपालगंज के मतदाताओं की संख्या में 12.13% की गिरावट आई, जो सबसे ज्यादा है। गोपालगंज में 17.02% मुस्लिम आबादी है।
गोपालगंज के बाद, किशनगंज में 9.69% और पूर्णिया में 8.41% मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। किशनगंज और पूर्णिया, दोनों ही पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे सीमांचल क्षेत्र हैं। यहाँ मुस्लिम आबादी काफी है।
2011 की जनगणना के अनुसार, 67.98% मुस्लिम आबादी के साथ, किशनगंज बिहार का एकमात्र मुस्लिम बहुल ज़िला है। पूर्णिया में 38.46% मुसलमानों की आबादी के साथ, राज्य में मुसलमानों का चौथा सबसे बड़ा जिला है। सीमांचल के एक और जिले कटिहार में 7.12% और अररिया में 5.55% मतदाता कम हुए हैं। कटिहार में मुस्लिम आबादी 44.47% है, वहीं अररिया में 42.95% है।
नेपाल से सटे दूसरे पाँच जिले मसलन मधुबनी, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल और पश्चिमी चंपारण में मतदाताओं की संख्या में 5% से अधिक की गिरावट देखी गई।
मधुबनी (18.25% मुस्लिम), भागलपुर (17.68%) और पूर्वी चंपारण (19.42%) में मतदाताओं की संख्या में 7% से 8% तक की गिरावट देखी गई। 15% से अधिक मुस्लिम आबादी वाले बाकी 7 जिलों में मतदाताओं की संख्या में 4% से 7% तक की गिरावट देखी गई।
केवल 10 जिलों में मतदाताओं की संख्या में 5% से कम की गिरावट देखी गई। इन 10 जिलों में से 6 जनसंख्या के मामले में राज्य के सबसे छोटे जिले हैं।
पटना के बाद दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला जिला पूर्वी चंपारण है, जहाँ मतदाताओं की संख्या में 7.08% की गिरावट देखी गई, जबकि मधुबनी और मुजफ्फरपुर में क्रमशः 7.9% और 5.59% की गिरावट देखी गई।
1 अगस्त की मसौदा मतदाता सूची और 30 सितंबर की अंतिम मतदाता सूची के बीच मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के मामले में, पूर्णिया 4.16% की वृद्धि के साथ शीर्ष पर रहा, वहीं सबसे कम वृद्धि दर (1.24% ) के साथ कटिहार सबसे नीचे रहा।
मतदाताओं की कुल संख्या की बात की जाए, तो पटना में सबसे ज़्यादा 1.64 लाख या 3.52% की वृद्धि देखी गई, इसके बाद मुज़फ़्फ़रपुर (88,108 या 2.75%) और मधुबनी (85,645 या 2.83%) का स्थान रहा।
एसआईआर के दौरान, 68.6 लाख नाम काटे गए, जिनमें से 65 लाख नाम 1 अगस्त को मसौदा सूची प्रकाशित होने पर और 3.66 लाख दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान हटाए गए। हालाँकि इस दौरान 21.53 लाख नए नाम भी जोड़े गए।
मसौदा चरण में हटाए गए 65 लाख नामों में से 22 लाख को मृत घोषित कर दिया गया, 36 लाख को स्थायी रूप से विस्थापित या अनुपस्थित दिखाया गया और 7 लाख पहले से ही कहीं और नामांकित थे।
भारत और नेपाल के बीच सीमा पर आवागमन में कोई रुकावट नहीं होती है। इसका फायदा उठाकर घुसपैठिए बड़ी संख्या में बिहार के सीमांचल में बस गए हैं। यही वजह है कि जनसंख्या से ज्यादा यहाँ आधार कार्ड मिले थे। इनमें बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या काफी है। एसआईआर के माध्यम से इन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

