खालिस्तान पर ब्रिटेन का वार, टेरर फंडिंग करने वाले गुरप्रीत सिंह रेहल की संपत्तियाँ कीं फ्रीज: ‘बब्बर अकाली लहर’ को घोषित किया आतंकी संगठन

खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा से जुड़े भारतीय मूल के बिजनेसमैन गुरप्रीत सिंह रेहल पर ब्रिटिश सरकार ने तगड़ा चाबुक चलाया है। भारत के बढ़ते दबाव और वैश्विक सुरक्षा चिंताओं के बीच ब्रिटेन ने गुरप्रीत सिंह रेहल को टेरर फंडिंग करने वाला मानते हुए उसके और उसके संगठन ‘बब्बर अकाली लहर’ पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिया है।

गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को ब्रिटिश सरकार ने खालिस्तानी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए काउंटर टेररिज्म (सैंक्शंस) (ईयू एग्जिट) रेगुलेशंस 2019 के तहत प्रतिबंध लागू किए। गुरप्रीत सिंह रेहल, बब्बर अकाली लहर और इनके जुड़े संगठनों की ब्रिटेन स्थित सभी संपत्तियां, बैंक खाते और आर्थिक संसाधन फ्रीज कर दिए गए।

ब्रिटिश संस्थाओं और नागरिकों को इन संसाधनों से लेन-देन करने या किसी भी वित्तीय सहायता देने से रोका गया है। प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर सात साल की जेल या 10 लाख पाउंड (1.2 करोड़) तक जुर्माना लग सकता है।

कंपनियों और कानूनी गतिविधियों पर कड़ा प्रतिबंध

रेहल से जुड़े सेविंग पंजाब CIC, व्हाइटहॉक कंसल्टेशंस लिमिटेड और अनइनकॉर्पोरेटेड संगठन लोहा डिजाइन्स पर भी रोक लगा दी गई। इसके अलावा रेहल को किसी भी कंपनी का निदेशक बनने या प्रबंधन में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया। यह कदम ब्रिटेन सरकार की वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग रोकने की सबसे सख्त कार्रवाई मानी जा रही है।

खालिस्तानी संगठनों से जुड़े आरोप और नेटवर्क का खुलासा

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, रेहल पर बब्बर खालसा और बब्बर अकाली लहर जैसे प्रतिबंधित संगठनों के साथ संपर्क रखने का गंभीर आरोप है। बताया गया है कि उसका नेटवर्क भर्ती अभियान चलाता था, वैश्विक स्तर पर फंडिंग जुटाता था और हथियारों तथा सैन्य सामग्रियों की खरीद में सहायता करता था। बब्बर अकाली लहर को बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सहयोगी और प्रचार व भर्ती विंग माना जाता है।

ब्रिटिश अधिकारियों का संदेश: आतंकवाद की फंडिंग अब नहीं बचेगी

ब्रिटेन के आर्थिक सचिव लूसी रिग्बी ने कहा कि आतंकवादियों को ब्रिटेन के वित्तीय सिस्टम का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसे ऐतिहासिक और निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि सरकार सभी उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर आतंकवाद की आर्थिक जड़ें काटने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत-ब्रिटेन रणनीतिक सहयोग और भविष्य की दिशा

यह फैसला भारत-ब्रिटेन के आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करता है, जो खासकर खालिस्तानी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक स्तर पर खालिस्तानी फंडिंग चैनलों पर असर पड़ेगा।

बब्बर खालसा, जो 1980 के दशक से हिंसा, विस्फोटक हमलों और राजनीतिक हत्याओं के लिए कुख्यात रहा है, अब उसकी वैश्विक गतिविधियों पर और सख्ती की उम्मीद है। आने वाले दिनों में और संगठनों व व्यक्तियों पर भी ऐसी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।