40 साल पुराने हिंदू मंदिर को ‘लालची’ काउंसिल ने इस्लामिक संगठन को बेचा, भड़के प्रबंधन ने ब्रिटेन के हाई कोर्ट से की फैसला रद्द करने की माँग

ब्रिटेन के पीटरबरो में 40 साल पुराने ‘भारत हिंदू समाज’ मंदिर की जमीन को एक इस्लामिक संगठन को बेचे जाने का मामला अब हाई कोर्ट पहुँच गया है। मंदिर प्रबंधन ने काउंसिल के इस फैसले को पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की माँग की है। वहीं काउंसिल और इस्लामिक संगठन इस विरोध को दबाने में जुटे हैं।

यह पूरा विवाद ईस्ट ऑफ इंग्लैंड के पीटरबरो शहर का है। यहाँ का ‘भारत हिंदू समाज’ मंदिर साल 1986 से इस जमीन पर चल रहा है। यह पूरे इलाके में हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा और मुख्य केंद्र है।

आरोप है कि पीटरबरो सिटी काउंसिल ने इस साल फरवरी में इस जमीन का मालिकाना हक चुपके से ‘यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन’ (UKIM) को बेच दिया। इस फैसले के बाद अब हिंदू समुदाय को अपनी ही जमीन से बेदखल होने का खतरा पैदा हो गया है।

पैसों की सनक में नियमों को ताक पर रखा

हाई कोर्ट में मंदिर के वकील ने काउंसिल की इस हरकत की धज्जियाँ उड़ा दीं। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन साल 2017 से इस जमीन को खरीदने के लिए काउंसिल से बातचीत कर रहा था। लेकिन बीच में इस्लामिक संगठन (UKIM) की एंट्री हो गई।

इस संगठन ने काउंसिल को लालच दिया कि वह हिंदुओं की तरफ से मिलने वाली किसी भी नकद राशि से 5% ज्यादा पैसा देगा। पैसों की भूख में अंधी हो चुकी काउंसिल ने तुरंत यह सौदा पक्का कर दिया, जबकि संगठन ने साफ कह दिया था कि इस जमीन पर सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए मजहबी स्थल बनेंगे।

अफसरों की मनमानी और दोहरी नीति का आरोप

हिंदू पक्ष के बैरिस्टर ने कोर्ट को बताया कि काउंसिल के अफसरों ने इस सौदे में भारी हेरफेर की है। कैबिनेट ने बिना सोचे-समझे अफसरों की बात मान ली और आँखें मूँदकर फैसला सुना दिया। यह सीधे तौर पर समानता कानून (Equality Act 2010) का उल्लंघन है।

इस फैसले का पीटरबरो के हिंदू समाज पर बहुत बुरा असर पड़ेगा क्योंकि उनके पास पूजा के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। दूसरी तरफ, जमीन हथियाने वाले इस्लामिक संगठन के पास देश भर में पहले से ही करीब 40 केंद्र और 60 शाखाएँ मौजूद हैं।

काउंसिल का अड़ियल रवैया और कोर्ट का रुख

इतने बड़े धोखे के बाद भी पीटरबरो सिटी काउंसिल अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। काउंसिल की वकील ने कोर्ट में अड़ियल रुख अपनाते हुए दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी थी।

काउंसिल का कहना है कि उन्होंने कई सालों की बातचीत के बाद ही यह फैसला लिया है। फिलहाल इस मामले की आक्रामक सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस मॉरिस के सामने चल रही है। कोर्ट इस हफ्ते के अंत तक अपनी सुनवाई पूरी कर लेगा, जिसके बाद लिखित फैसला सुनाया जाएगा।