ब्रिटेन में तीन लड़कों को नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म करने के बावजूद जेल नहीं भेजा गया। अदालत ने उन्हें सिर्फ यूथ रिहैबिलिटेशन ऑर्डर (सुधारात्मक निगरानी) दिया और 26 पाउंड (यानि करीब 3 हजार रुपए) का कोर्ट शुल्क भरने का आदेश दिया।
क्या है वो तीन मामले
पहले मामले में एक लड़का, जिसकी उम्र अपराध के समय 14 साल थी, तीन अलग-अलग यौन अपराधों का दोषी पाया गया। उस पर एक लड़की से दुष्कर्म और दो अन्य यौन हमलों का आरोप साबित हुआ।
दिसंबर 2025 में उसे 30 महीने के लिए सेक्स ऑफेंडर रजिस्टर में रखने और रिहैबिलिटेशन ऑर्डर की सजा दी गई। दूसरे मामले में 15 साल के लड़के को 14 साल की लड़की के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया। उसे 42 महीने तक सेक्स ऑफेंडर रजिस्टर में रखने, रिहैबिलिटेशन ऑर्डर और पीड़िता से दूर रहने का आदेश दिया गया।
तीसरे मामले में 17 साल के लड़के को 15 साल की लड़की से दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया। सितंबर 2025 में उसे भी जेल नहीं भेजा गया और सिर्फ रिहैबिलिटेशन ऑर्डर तथा 30 महीने के लिए सेक्स ऑफेंडर रजिस्टर में रखने की सजा दी गई।
एक पीड़िता ने कहा कि उसे लगता है कि उसका हमलावर बिना किसी वास्तविक सजा के बच निकला। उसने बताया कि वह आज भी डर के साथ जी रही है और हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कहीं आरोपित फिर सामने न आ जाए।
महिला अधिकार संगठनों और पीड़ितों की मदद करने वाले समूहों ने इन सजाओं को बेहद नरम बताया है। उनका कहना है कि इतनी हल्की सजा से अपराधियों के मन में कानून का डर कम होगा और पीड़िताओं का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो जाएगा। वहीं, ब्रिटिश न्याय मंत्रालय का कहना है कि सजा का फैसला अदालतें कानून और तय दिशानिर्देशों के अनुसार स्वतंत्र रूप से करती हैं।

