सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने जनवरी 2024 से अब तक पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगभग 350 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। यानी औसतन हर दूसरे दिन एक तस्कर पकड़ा गया है। 553 किलोमीटर लंबी सीमा पर चलाए गए इस अभियान के दौरान BSF ने नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के कई प्रयासों को नाकाम किया है।
उच्च जोखिम वाले जिले और विस्तारित अधिकार क्षेत्र
ज्यादातर गिरफ्तारियाँ अमृतसर, तरन तारन और फिरोजपुर जिलों में की गई हैं। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ये क्षेत्र पाकिस्तान की ओर से ड्रोन घुसपैठ की घटनाओं के लिए भी कुख्यात हैं। साल 2021 में केंद्र सरकार ने BSF के अधिकार क्षेत्र को सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया था, जिससे BSF को व्यापक क्षेत्र में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की शक्ति मिल गई।
उस समय कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जैसे राजनीतिक दलों ने इस निर्णय का विरोध किया था। हालाँकि, अधिकारियों का कहना है कि BSF द्वारा की जा रही अधिकांश गिरफ्तारियाँ अब भी पुराने 15 किलोमीटर के दायरे के भीतर ही होती हैं।
ड्रोन, नाबालिग और सीमा पार की रणनीति
BSF के प्रवक्ता उप महानिरीक्षक एके विद्यार्थी ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तानी तस्कर अब ड्रोन और GPS आधारित डिलीवरी तरीकों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं ताकि निगरानी से बचा जा सके। बड़ी संख्या में हुई गिरफ्तारियाँ यह दर्शाती हैं कि सीमा सुरक्षा बल(BSF) सीमा पार तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
जनवरी से सितंबर 2024 के बीच BSF ने कुल 347 तस्करों को गिरफ्तार किया, जिनमें 16 पाकिस्तानी घुसपैठिए, 4 नेपाली और 3 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे। इसके अलावा, BSF ने तीन पाकिस्तानी घुसपैठियों को भी मार गिराया। विशेष रूप से, एक वरिष्ठ BSF अधिकारी ने खुलासा किया कि पाकिस्तानी हैंडलर अक्सर अपने भारतीय संपर्कों पर दबाव डालते हैं कि वे नाबालिगों को कुरियर के रूप में भर्ती करें ताकि कानूनी नरमी का फायदा उठाकर शक से बचा जा सके।
उन्नत निगरानी और संयुक्त अभियान
पंजाब सीमा पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी लगातार बढ़ती हुई चुनौती बनी हुई है। समय के साथ BSF ने इस समस्या से निपटने के लिए जमीनी और हवाई निगरानी को और मजबूत किया है। इसके लिए नाइट विजन उपकरण, मोशन सेंसर और एंटी-ड्रोन सिस्टम का उपयोग बढ़ाया गया है। वहीं, पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने सीमा पार सक्रिय तस्करी गिरोहों से जुड़े स्थानीय तस्करों का पता लगाने में BSF की बड़ी मदद की है।

