कनाडा में खालिस्तानियों पर सख्ती, बब्बर खालसा से जुड़े झंडों और प्रतीकों पर लगा बैन: हाउस ऑफ कॉमंस में पास हुआ C-9 बिल

कनाडा की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस ने एक महत्वपूर्ण और व्यापक असर वाले विधेयक बिल C-9 (कॉम्बेटिंग हेट एक्ट) को पारित कर दिया है। 25 मार्च 2026 को तीसरी रीडिंग में पास हुआ यह बिल अब आगे की मंजूरी के लिए सीनेट ऑफ कनाडा के पास भेजा गया है।

हालाँकि यह अभी कानून नहीं बना है, लेकिन इसे कनाडा में लंबे समय से उठ रही चिंताओं, खासतौर पर खालिस्तानी कट्टरपंथ के सार्वजनिक महिमामंडन पर एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

विधेयक का सबसे अहम प्रावधान यह है कि अब सार्वजनिक जगहों पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल कर किसी पहचान योग्य समूह के खिलाफ जानबूझकर नफरत फैलाना अपराध माना जाएगा।

इसका सीधा असर बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन जैसे संगठनों पर पड़ेगा, जिन्हें कनाडा के कानून के तहत पहले से ही आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। इनके झंडे लहराना या प्रचार सामग्री बाँटना अब कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

इन संगठनों का नाम खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनका संबंध 1985 के एअर इंडिया फ्लाइट 182 बॉम्बिंग जैसे बड़े आतंकी हमले से जोड़ा जाता रहा है, जिसमें 329 लोगों की जान गई थी।

धार्मिक स्थलों और संस्थानों की सुरक्षा पर फोकस

नए कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी भी समुदाय के स्कूल, धार्मिक स्थल या सांस्कृतिक केंद्रों तक लोगों की पहुँच रोकना, उन्हें डराना-धमकाना या बाधा डालना एक अलग अपराध माना जाएगा।

यह कदम खास तौर पर उन घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है, जिनमें कनाडा में गुरुद्वारों, हिंदू मंदिरों और अन्य सामुदायिक स्थलों के बाहर विरोध, तोड़फोड़ और धमकियों की शिकायतें सामने आई थीं।

इंडो-कनाडाई समुदाय लंबे समय से माँग कर रहा था कि ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानूनी ढाँचा बने, यह बिल उसी दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।

इंडो-कनाडाई समुदाय की प्रतिक्रिया और आगे की राह

इंडो-कनाडाई समुदाय इस बिल को बड़ी राहत और उपलब्धि के तौर पर देख रहा है। उनका मानना है कि इससे वर्षों से जारी डर, धमकी और तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। हालाँकि समुदाय की एक बड़ी माँग अभी बाकी है।

वे चाहते हैं कि भारतीय दूतावासों और कूटनीतिक परिसरों को भी ‘प्रोटेस्ट बबल’ के तहत विशेष सुरक्षा दी जाए, क्योंकि अतीत में वहाँ भी प्रदर्शन और हमलों की घटनाएँ हुई हैं।