प्रेमी के साथ मर्जी से भागी नाबालिग तो अपहरण का मामला नहीं: छत्तीसगढ़ HC का फैसला, 20 साल से सजा काट रहे युवक को किया बरी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ‘दीपक वैष्णव बनाम राज्य’ मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल पेश की है। HC ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नाबालिग लड़की बिना किसी दबाव, लालच या जबरदस्ती के अपनी मर्जी से किसी के साथ जाती है, तो उस व्यक्ति पर अपहरण (किडनैपिंग) का केस नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर HC ने 20 साल की सजा काट रहे एक युवक को बरी कर दिया है।

ट्रायल कोर्ट की सजा पलटी

निचली अदालत ने 24 वर्षीय आरोपित को POCSO एक्ट के तहत दोषी मानते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हालाँकि, छत्तीसगढ़ HC ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि लड़की को बहलाया-फुसलाया गया था।

यह विवाद सितंबर 2022 का है। 15 साल की लड़की घर से स्कूल के लिए निकली और आरोपित के साथ चली गई। दोनों ने रायपुर, हैदराबाद और विजयवाड़ा जैसे शहरों में करीब एक महीना बिताया। HC ने गौर किया कि लड़की ने इस दौरान कहीं भी विरोध नहीं किया और न ही भागने की कोशिश की, जो उसकी मर्जी को दर्शाता है।

सबूतों का अभाव और बरी

छत्तीसगढ़ HC ने कहा कि अपहरण के लिए ‘बल या लालच’ का होना अनिवार्य है। इस केस में मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी यौन शोषण के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने आरोपित को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।