छत्तीसगढ़ के कांकेर में जनजातीय समुदाय के लोगों और ईसाई बन गए लोगों के बीच शव दफनाने को लेकर हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। जनजातीय लोगों ने कुछ दिनों पहले एक चर्च में तोड़फोड़ कर दी थी और अब जिले के एक गाँव में शीतला माता मंदिर में आग लगाए जाने का मामला सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (19 दिसंबर 2025) को अज्ञात लोगों ने मंदिर में घुसकर देवी-देवताओं के आसन और अन्य सामान को आग के हवाले कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है। जिस गाँव में मंदिर में आगजनी हुई हैं वहाँ के सरपंच का कहना है कि घटना को ऐसे लोगों ने अंजाम दिया है जो उनकी परंपराओं को नहीं मानते हैं और उन्होंने धर्म बदल चुके लोगों पर शक जताया है।
इससे पहले कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र अंतर्गत बड़े तेवड़ा गाँव में 18 दिसंबर को शव दफनाने के मुद्दे पर आदिवासी समाज और धर्मांतरित समुदाय के बीच तनाव हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट में हालात तेजी से बिगड़ गए।
जानकारी के अनुसार, गाँव के कनवर्टेड ईसाई सरपंच राजमन सलाम के पिता चमरा राम सलाम के निधन के बाद सरपंच द्वारा परंपराओं को दरकिनार करते हुए अपने पिता के शव को गाँव की उसी जमीन में दफनाए जाने का आरोप है, जहाँ आदिवासी समाज अपने रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करता है।
घटना की जानकारी मिलते ही आदिवासी समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। उन्होंने इसे परंपराओं और सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए प्रशासन से शव को जमीन से बाहर निकालने की मांग की। इस माँग को लेकर दो दिनों तक विरोध प्रदर्शन चलता रहा लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आदिवासी समाज का विरोध धीरे-धीरे हिंसा में बदल गया।
स्थिति और अधिक तनावपूर्ण तब हो गई जब आदिवासी समाज के लोगों ने गाँव के चर्च में आग लगा दी। घटना की सूचना फैलते ही आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग आमाबेड़ा पहुँचने लगे। बताया जा रहा है कि करीब 3,000 से अधिक की भीड़ एकत्र हो गई, जिसके बाद आमाबेड़ा में स्थित एक अन्य चर्च को भी आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में पुलिसकर्मी समेत 20 से अधिक लोग घायल हुए थे।

