CIA का ‘डिसेप्शन कैंपेन’ और अमेरिकी सेना ने पहाड़ों में छिपे कर्नल का गोलीबारी के बीच किया रेस्क्यू: पढ़ें- US ने ईरान में कैसे अंजाम दिया ‘सबसे बहादुर ऑपेरशन’

शुक्रवार (03 अप्रैल 2026) को ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिका का F-15E फाइटर जेट मार गिराया है। इस हमले में एक पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया था, वहीं दूसरा पायलट लापता था। इस बीच ईरान ने एक पब्लिक नोटिस जारी किया कि जो कोई भी फाइटर जेट में सवार पायलटों को पकड़ेगा उसे इनाम दिया जाएगा। इसके दो दिन बाद अमेरिका ने अपने पायलट को ईरान के नाक के नीचे से बचा लिया, जिसके लिए अमेरिकी सेना ने खास सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह रेस्क्यू ऑपेरशन अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बहादुर रेस्क्यू ऑपरेशन में से एक था। उन्होंने कहा कि ईरान में दुश्मन की सीमा पर फँसे एक अमेरिकी कर्नल को बचाना आसान नहीं था। यह काम कई घंटों तक लगातार नजर रखने, आपसी तालमेल और बड़े सैन्य अधिकारियों की जोखिम भरी योजना की वजह से सफल हो पाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेस्क्यू ऑपरेशन की सारी डिटेल साझा करते हुए कहा, “हमने उन्हें बचा लिया! मेरे प्यारे अमेरिकियों, पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ने अपने इतिहास के सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक को अंजाम दिया। यह अभियान हमारे एक बहादुर क्रू मेंबर अधिकारी के लिए था, जो एक सम्मानित कर्नल भी हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।”

कैसे दुश्मन इलाके में अमेरिका ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन?

इस मिशन की शुरुआत ईरान के भीतर दुर्गम पहाड़ी इलाके में फँसे पायलट की लोकेशन की लगातार ट्रैकिंग से हुई। उधर ईरानी सैनिक भी पायलट को घेरने के जद्दोजहद कर रही थीं, जिसके चलते यह ऑपरेशन कठिन रहा।

अमेरिकी सेना ने उसके हर कदम पर 24 घंटे नजर रखी, खतरों का आकलन कर रहे थे और कार्रवाई के लिए सही समय तलाश रहे थे। जैसे-तैसे स्थिति ज्यादा गंभीर होती गई, दुश्मन के इलाके के अंदर जाकर उसे निकालने के लिए एक जोखिम भरी योजना तैयार कर ली गई। ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने क्रू मेंबर को निकालने के लिए दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस कई विमान भेजे। इस दौरान उसे कुछ चोटें आईं, लेकिन उसका इलाज जारी है।

ट्रंप ने यह भी बताया कि पहले पायलट को बचाने के बाद शनिवार (04 अप्रैल 2026) को यह रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। सैन्य इतिहास में यह पहली बार है जब दुश्मन के इलाके के भीतर से दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित बाहर निकाला गया है। ट्रंप ने कहा, “हम कभी भी अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोडे़ंगे।”

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “इन दोनों ऑपरेशनों को बिना किसी अमेरिकी सैनिक की मौत या गंभीर चोट के पूरा करना यह दिखाता है कि ईरान के आसमान में हमारी पकड़ और ताकत बहुत मजबूत है।”

CIA की ‘भ्रामक अभियान’ से सफल हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

यह रेस्क्यू ऑपेरशन अकेले अमेरिकी सैनिकों ने सफल नहीं बनाया, बल्कि इसके पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) का भी बड़ा हाथ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CIA ने ही पायलट की लोकेशन रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस को दी, जिसके बाद ही अमेरिकी सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

CIA ने ईरान के भीतर एक ‘भ्रामक अभियान‘ चलाया ताकि ईरान के सुरक्षाबलों को पायलट के ठिकाने के बारे में गुमराह किया जा सके। CIA ने सूचना फैलाई कि अमेरिकी सैनिकों ने पायलट की लोकेशन तलाश ली है और जमीन के रास्ते से उसे वापस अमेरिका ले जाया जा रहा है। इससे ईरानी सेना में भ्रम की स्थिति बन गई और असल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन से ध्यान भटक गया।

जब ईरानी सेना पूरी तरह से भ्रम में आ चुकी थी, तब अमेरिकी सेना ने पायलट को तलाशना शुरू किया और नतीजतन ढूँढ निकाला। अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन को ‘तिनके के ढेर में सुई ढूँढने’ जैसा बताया, क्योंकि पर्वत की दरारों में छिपा दूसरे क्रू मेंबर को बिना खुफिया क्षमताओं के ढूँढना बेहद मुश्किल था। क्रू मेंबर की लोकेशन पता लगते ही CIA ने इसकी जानकारी अमेरिकी सेना को दी, जिन्होंने क्रू मेंबर को बचा लिया।