पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया कि महात्मा गाँधी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि लौटा दी थी।
सोमवार (20 अप्रैल 2026) को एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जब जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ था, तब महात्मा गाँधी जी ने ‘ओई मोनिहार आमाय नाही साजे’ गीत लिखा और ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई नाइटहुड की उपाधि का त्याग कर दिया था।
“Gandhi ji had returned his knighthood in protest of the Jallianwala Bagh massacre,”
— Facts (@BefittingFacts) April 21, 2026
– Says Mamata Banerjee
And these people pretend to be the saviors of Bengal. Every kid knows it was Rabindranath Thakur who returned his knighthood after the Jallianwala Bagh massacre. pic.twitter.com/skhGCK2aBT
ममता बनर्जी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इतिहास के वास्तविक तथ्यों के अनुसार, महात्मा गाँधी को कभी ब्रिटिश सरकार द्वारा ‘नाइटहुड’ की उपाधि नहीं दी गई थी।
असल में, महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य में उनके योगदान के लिए 1915 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया था। 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड से रवींद्रनाथ टैगोर इतने आहत हुए थे कि उन्होंने एक महीने बाद मई 1919 में अपनी यह उपाधि वापस कर दी थी।
इतना ही नहीं, ममता बनर्जी ने जिस गीत का जिक्र गाँधी जी के नाम पर किया, उसके वास्तविक रचयिता भी रवींद्रनाथ टैगोर ही हैं। ममता बनर्जी के इस दावे को विपक्ष द्वारा ‘नया इतिहास रचने’ की कोशिश बताया जा रहा है।

