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CWG 2026 की मेडल टैली में क्यों पिछड़ा भारत, शूटिंग-रेसलिंग जैसे खेलों के हटने से कितने बदले समीकरण: जानिए कैसे बॉक्सर देश को दिला सकते हैं टॉप 5 में जगह

मेडल टैली में भारत के नीचे खिसकने का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण कुछ विशेष खेलों का इस आयोजन से बाहर होना है। पिछले कई संस्करणों में भारत की झोली में सबसे अधिक पदक शूटिंग (निशानेबाजी) और कुश्ती जैसे खेलों से आते रहे हैं।

ग्लासगो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 (Commonwealth Games 2026) के इस संस्करण में भारतीय खेल प्रेमियों के लिए शुरुआती चरण थोड़ा चिंताजनक नजर आ रहा है। मेडल टैली में भारत की वर्तमान स्थिति को लेकर खेल गलियारों में गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। पारंपरिक रूप से भारत जिन स्पर्धाओं में सबसे अधिक पदक बटोरता रहा है, इस बार उन खेलों की अनुपस्थिति या भारी कटौती ने सीधे तौर पर देश की पदक तालिका को प्रभावित किया है। हालाँकि इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय दल के पास अब भी टॉप 5 में अपनी जगह पक्की करने का एक बेहद सुनहरा मौका बना हुआ है।

भारत के पसंदीदा खेलों के बाहर से पड़ा मुख्य अंतर

दरअसल, इस बार मेडल टैली में भारत के नीचे खिसकने का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण कुछ विशेष खेलों का इस आयोजन से बाहर होना है। पिछले कई संस्करणों में भारत की झोली में सबसे अधिक पदक शूटिंग (निशानेबाजी) और कुश्ती जैसे खेलों से आते रहे हैं। लेकिन 2026 के इस संस्करण के संशोधित कार्यक्रम से इन दोनों ही प्रमुख स्पर्धाओं को पूरी तरह हटा दिया गया है।

आँकड़े गवाही देते हैं कि पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने अकेले शूटिंग और कुश्ती से रिकॉर्ड तोड़ पदक जीते थे। इन खेलों के हटने से भारत के लगभग 25 से 30 पदकों का सीधा नुकसान हुआ है, जिसने पूरी तालिका के गणित को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।

इस बार क्यों हुआ कम खेलों का आयोजन?

इसकी सबसे बड़ी वजह है ग्लास्गो का राष्ट्रमंडल खेल 2026 (CWG 2026) के लिए मेजबान शहर का चयन एक बहुत बड़े संकट और आखिरी समय के अप्रत्याशित घटनाक्रम का नतीजा। दरअसल, मूल रूप से राष्ट्रमंडल खेल 2026 की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया (Victoria) राज्य को दी गई थी। लेकिन जुलाई 2023 में विक्टोरिया के तत्कालीन प्रीमियर ने यह कहते हुए अचानक मेजबानी से अपने हाथ खींच लिए कि खेलों के आयोजन का अनुमानित खर्च बेहद ज्यादा बढ़ गया है।

शुरुआत में इसका बजट लगभग $2.6 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तय किया गया था, जो बढ़कर $6 से $7 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुँच गया था। इतने बड़े आर्थिक बोझ को उठाने से विक्टोरिया के मना करने के बाद राष्ट्रमंडल खेलों के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे और कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (CGF) को आपातकालीन स्थिति में नया मेजबान तलाशना पड़ा।

ग्लाग्सो ने बचाया इस बार का राष्ट्रमंडल खेल

खेलों को रद्द होने से बचाने के लिए स्कॉटलैंड के ग्लास्गो (Glasgow) शहर ने बेहद कम समय में एक अनोखा और किफायती प्रस्ताव सामने रखा। जिसमें ग्लास्गो (जिसने 2014 में भी CWG की सफल मेजबानी की थी) ने स्पष्ट किया कि वह खेलों को रद्द होने से बचाने के लिए एक ‘डाउनसाइज्ड’ (किफायती) मॉडल पर काम करेगा। इसके लिए खेलों को केवल लगभग 114 मिलियन पाउंड के सीमित बजट में पूरा करने का खाका तैयार किया गया। इसमें ऑस्ट्रेलिया द्वारा विक्टोरिया अनुबंध तोड़ने के एवज में दिए गए मुआवजे के 100 मिलियन पाउंड शामिल थे, जिससे स्थानीय करदाताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा।

ग्लास्गो ने खेलों का दायरा घटाकर केवल 10 मुख्य स्पर्धाओं तक सीमित कर दिया और नए स्टेडियम बनाने के बजाय अपने मौजूदा खेल परिसरों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया। इसके बाद सितंबर 2024 में स्कॉटिश सरकार की मंजूरी मिलने के बाद CGF ने आधिकारिक तौर पर ग्लास्गो को CWG 2026 का नया मेजबान घोषित कर दिया।

भारत ने 2010 के आयोजन के लिए खर्च की थी भारी रकम

भारत की मेजबानी में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों (CWG 2010) में 21 खेलों की 272 प्रतिस्पर्धाएँ थी। इसमें 4352 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इन खेलों के आयोजन में भारत सरकार ने जमकर पैसे खर्च किए थे और एक तरह से दिल्ली को नए सिरे से संवारा गया था। खेल आयोजन के लिए निर्माण के साथ ही रोड-फ्लाईओवर, खेल गाँव तक के निर्माण पर जमकर पैसे खर्च किए गए थे।

भारत ने इन मुकाबलों में 38 स्वर्ण समेत 101 मेडल जीते थे और ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर पर रहा था। जो अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। अभी पिछले राष्ट्रमंडल खेलों (बर्मिंघम) में भारत 22 स्वर्ण समेत कुल 61 पदकों के साथ चौथे नंबर पर रहा था।

इसके मुकाबले ग्लास्गो में सिर्फ 10 खेलों में 215 प्रतिस्पर्धाएँ ही हैं। खिलाड़ियों की संख्या भी महज 2729 तक ही सीमित है। ग्लास्गो ने इन गेम्स के लिए कोई अलग तैयारी नहीं की है और न ही किसी तरह का खेल गाँव बनाया है। यूनिवर्सिटी के हॉस्टल्स और होटल्स को अस्थाई तौर पर एथलीटों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यही नहीं, भारत के लिए सबसे ज्यादा पदक देने वाले कुश्ती और निशानेबाजी जैसी प्रतिस्पर्धा पूरी तरह से इस बार के CWG से बाहर हैं।

भारतीय दल के वर्तमान हालात और आगामी संभावनाओं पर बात करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने बयान में कहा, “हम अच्छी तरह जानते हैं कि शूटिंग और कुश्ती के न होने से हमारे पदकों की संख्या पर असर पड़ा है, लेकिन हमारे खिलाड़ियों का हौसला जरा भी कम नहीं हुआ है। ग्लास्गो का मॉडल अलग है, पर हमारे मुक्केबाज और भारोत्तोलक जिस तरह का प्रदर्शन कर रहे हैं, हमें पूरा यकीन है कि हम अंतिम दिनों में पदक तालिका में एक बड़ी छलांग लगाएँगे और शीर्ष 5 में अपनी जगह पक्की करेंगे।”

CWG 2026 में कैसी है पदक तालिका?

पदक तालिका की मौजूदा स्थिति की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया 55 स्वर्ण पदकों के साथ सबसे आगे शीर्ष पर बना हुआ है। 18 स्वर्ण पदकों के साथ ब्रिटेन दूसरे, 17 स्वर्ण के साथ कनाडा तीसरे, मेजबान स्कॉटलैंड 10 स्वर्ण पदकों के साथ चौथे और नाइजीरिया 9 स्वर्ण पदकों के साथ पाँचवें नंबर पर है।

भारत इस समय 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य समेत कुल 23 पदकों के साथ 10वें नंबर पर बना हुआ है। भारत से आगे 9वें नंबर पर वेल्स (6 स्वर्ण), 8वें पर मलेशिया (7 स्वर्ण), 7वें पर दक्षिण अफ्रीका (7 स्वर्ण) और 6ठे नंबर पर 7 ही स्वर्ण पदकों के साथ न्यूजीलैंड मौजूद है।

हालाँकि 1 अगस्त का दिन इन राष्ट्रमंडल खेलों में पदक के लिहाज से भारत के लिए सबसे अहम दिन साबित होने जा रहा है। भारत के 10 मुक्केबाज कम से कम रजत पदक पक्का कर चुके हैं और रिंग में उतरेंगे। अब देखना यह होगा कि इन 10 में से कितने खिलाड़ी गोल्ड मेडल में इसे बदलते हैं, जिसकी संभावनाएँ सर्वाधिक नजर आ रही हैं।

क्योंकि ये 10 पदक बॉक्सिंग में हैं और इंडियन बॉक्सर इस समय अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में भी हैं और बिना किसी खास चुनौती के फाइनल तक पहुँचने में सफल रहे हैं। यदि इन 10 फाइनल मुकाबलों में से भारत 5 स्वर्ण पदक भी जीतने में कामयाब रहता है, तो CWG 2026 में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 10 हो जाएगी, जो उसे सीधे तौर पर मेडल टैली में टॉप 4 या टॉप 5 की रेस में ला खड़ा करेगी। मौजूदा समय में भारत ने 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य समेत 23 पदक जीते हैं।

भारतीय मुक्केबाजी टीम के मुख्य कोच ने मुक्केबाजों की तैयारी पर अपना पूरा भरोसा जताते हुए अपने बयान में कहा, “हमारे सभी 10 रिंग योद्धा पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हैं। उन्होंने फाइनल तक के सफर में जिस तरह का दबदबा दिखाया है, उससे देश को कई स्वर्ण पदक मिलने तय हैं। यह शनिवार भारतीय खेलों के लिए एक ऐतिहासिक दिन साबित होगा और हम पदक तालिका का पूरा गणित बदल कर रख देंगे।”

टॉप 5 में जगह बनाना लक्ष्य, भविष्य के लिए मिले काफी सबक

बहरहाल, देखा जाए तो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का यह डाउनसाइज्ड संस्करण भारतीय खेल प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक होने के साथ-साथ हमारी नई खेल प्रतिभाओं को परखने की एक बेहतरीन कसौटी भी साबित हो रहा है। निशानेबाजी और कुश्ती जैसी पारंपरिक स्पर्धाओं की अनुपस्थिति में भी भारतीय एथलीटों ने जिस निडरता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, वह यह साफ दर्शाता है कि भारतीय खेलों का भविष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रतिकूल परिस्थितियों और अंतिम समय में बदले गए नियमों के बावजूद खिलाड़ियों का यह जज्बा साबित करता है कि भारतीय दल केवल परिस्थितियों के भरोसे रहने के बजाय हर चुनौती को अवसर में बदलने का हुनर रखता है।

आने वाले अंतिम मुकाबले और मुक्केबाजी के फाइनल दौर भारतीय प्रशंसकों के उत्साह को चरम पर पहुँचाने वाले हैं। रिंग में हमारे एथलीटों का आक्रामक फॉर्म, युवा खिलाड़ियों की बेफिक्र सोच और जुझारूपन इस बात की गवाही दे रहा है कि भारत इस प्रतियोगिता का समापन शानदार तरीके से करेगा। पूरी उम्मीद है कि भारतीय दल इन बाधाओं को पछाड़ते हुए अंतिम दिनों में पदकों की झड़ी लगाएगा, न केवल मेडल टैली के टॉप 5 में अपनी जगह पक्की करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर तिरंगे का परचम लहराकर देश को एक बार फिर से गौरवान्वित होने का ऐतिहासिक अवसर देगा।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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